Showing posts with label mother and child care. Show all posts
Showing posts with label mother and child care. Show all posts

Monday, December 20, 2010

शिशु स्वास्थ्य, मातृत्व कल्याण एवं पोषण पर आधारित आडियो श्रृंखला - रचना

रचना (9 एपिसोड हिन्दी पाडकास्ट)
धारावाहिक रचना प्रजनन एवं शिशु स्वास्थ्य, मातृत्व कल्याण एवं पोषण पर आधारित 9 एपिसोड की एक धारावाहिक श्रृंखला है।जिसके लेखक डा.आर.के.टंडन हैं। इसका निर्माण केयर इंडिया द्वारा लिब्रा मीडिया ग्रुप बिलासपुर द्वारा करवाया गया था। प्रसारण जून-जुलाई 2006 में आकाशवाणी के बिलासपुर केन्द्र से हुआ था। 
प्रतिभागी कलाकार हैं- संध्या, हर्षिता पाण्डेय, नम्रता बाजपेयी, पद्मामणि, संज्ञा, श्वेता पाण्डेय, ऐश्वर्यलक्ष्मी बाजपेयी, कंचन, निशा, रचिता, विवेक पाण्डेय, राजेश, रमेश चंद्र, उमा महरोत्रा, शाकम्बरी टंडन, स्वरित, रीतेश दुबे, बेबी रूपल रस्तोगी। 
हमारे पाडकास्ट सीजीस्वर के माध्यम से ये आप तक पहुँचा। विभिन्न एपिसोड के आलेख एवं आडियो इसी ब्लाग में हैं। आखिरी एपिसोड के पश्चात् हम सारे अंकों के आडियो एक साथ इस ब्लाग में आपके लिये प्रस्तुत कर रहे हैं।

रचना लिब्रा मीडिया ग्रुप द्वारा निर्मित एक ऐसा धारावाहिक था जिसके हर एपिसोड के प्रथम भाग में एक पारिवारिक ड्रामा था। इसको एक कहानी के रूप में प्रस्तुत किया गया था ‘रचना’ नामक लड़की की कहानी उसकी किशोरावस्था से लेकर उसके बच्चे के अन्नप्राशन तक धारावाहिक के रूप में प्रस्तुत की थी। इस कहानी में अधिक से अधिक संदेश एवं जानकारियाँ देने का प्रयास किया गया था। प्रथम भाग की मुख्य पात्र रचना के अलावा एपिसोड में दो महिला कंपीयर्स थीं, जो इस कहानी से मिलने वाले संदेशों के अलावा अन्य जानकारियाँ तो देती ही थीं, साथ ही कार्यक्रम को जोड़कर रखने का काम करती थीं। एपिसोड के दूसरे भाग में किसी डाक्टर या रिसोर्स पर्सन से उस विषय पर, समस्याओं पर बातचीत की जाती थी।
हम इस धारावाहिक में से 9 कड़ियों के सिर्फ पहले भाग को ही आपके लिये पाडकास्ट बनाकर सुनवाने के लिये लाए हैं। नाटक के रूप में यह प्रस्तुतियाँ संदेषात्मक भी हैं।

एपिसोड क्रमांक 1 - किशोरावस्था


एपिसोड क्रमांक 2 - शादी की उम्र


एपिसोड क्रमांक 3 - गर्भावस्था के शुरूवाती 6 महीने


एपिसोड क्रमांक 4 - गर्भावस्था के अंतिम 3 महीने


एपिसोड क्रमांक 5 - प्रसव


एपिसोड क्रमांक 6 - 1 माह


एपिसोड क्रमांक 7 - 2-6 माह


एपिसोड क्रमांक 8 - अन्नप्राशन


एपिसोड क्रमांक 9 - संक्षिप्तिका

रेडियो धारावाहिक रचना - 9

एपिसोड नंबर 9
संक्षिप्तिका
सूत्रधार 1-  रचना को हमने पिछले अंको में किशोरी बालिका के रूप में, दुल्हन के रूप में, बहू के रूप में, और फिर अच्छी माता के रूप में देखा लेकिन आज रचना कहां है?
सूत्रधार 2- जानना चाहोगी।
सूत्रधार 1- हाँ
सूत्रधार 2- बिलासपुर जिले में आज जिला स्तर स्वस्थ शिशु प्रतियोगिता हो रही है। हमारी रचना को पूरी ग्राम पंचायत और सभी सहमति से अपने ग्राम पंचायत के प्रतिनिधित्व करने के लिए भेजा गया है।
सूत्रधार 1- वहां पर क्या हुआ है।
सूत्रधार 2- वहां जो हुआ है, सरला वहां चल कर सुनते है।
सूत्रधार 1- चलो।


संचालक -  भाइयों और बहनों स्वस्थ माता और स्वस्थ बालक प्रतियोगिता में आपका स्वागत है। नतीजे बताने का समय आ चुका है और मैं आपको ये बता दूँ कि इस बार के नतीजे बेहद चौंकाने वाले हैं। हमारी संस्था के और इस प्रतियोगिता के इतिहास में ये पहला अवसर होगा जब स्वस्थ माता और स्वस्थ शिशु का ये पहला इनाम शहर से बाहर जायेगा। जी हाँ अब अंदाज लगाइये, बिल्कुल भी नहीं लगा सकते। तो चलिये मैं ही बता दूँ, हमारे पाँच जजों के पैनल ने जिसमें जिलाधीश महोदय, केयर की अधिकारी और महिला बाल विकास अधिकरी के साथ शिशु रोग विशेषज्ञ भी हैं। इन सबका एकमत निर्णय है कि ग्राम धरदेई जो शहर से 35 किलामीटर दूर है वहाँ की रचना और उनके बेटे गोलू को जाता है। (तालियाँ)
रचना -    चल बेटा।
गोलू  -    माँ ये सब क्या हो रहा है?
रचना -    तुमको इनाम मिल रहा है ना।
गोलू -     क्यो माँ?
रचना -    तुम अच्छे बच्चे हो।
गोलू -     मैं तुम्हारी बात मानता हूँ और अच्छे से खाना खाता हूँ इसलिये!
संचालक -  आइये आइये रचना जी।
रचना -    धन्यवाद।
संचालक -  आपको स्वस्थ माता का इनाम हमारी संस्था से मिलने पर बहुत बहुत बधाइयाँ और आइये मास्टर गोलू आपको स्वस्थ बालक का इनाम बहुत मुबारक हो।
गोलू  -    थैंक्यू।
संचालक -  आइये आप दोनों जिलाधीश महोदय से अपना इनाम प्राप्त कीजिये।  (तालियाँ)
संचालक -  तो मास्टर गोलू आप बड़े होकर क्या करोगे?
गोलू -     मैं पापा, मम्मी और दादी के पास रहूँगा।
संचालक -  लेकिन तुम बनोगे क्या?
गोलू -     मैं डॉक्टर बनूँगा और सब लोग की बीमारी दूर करूँगा।  (तालियाँ)
संचालक -  रचना जी आपने शहरी क्षेत्र के इतने सारे दावेदारों को पीछे छोड़कर स्वस्थ माता का पुरस्कार प्राप्त किया है और आपके ही बेटे ने स्वस्थ शिशु का। कैसे हो पाया ये सब।
रचना   -  जी!
संचालक -  मतलब ये .....सब कैसे हुआ।    
रचना -    जी...जी...मैं क्या बताऊँ।
संचालक -  अच्छा हमें इतना बता दीजिये कि इसका श्रेय आप किसको देंगी।
रचना -    जी इसका श्रेय मैं अपने पति, अपनी सास, आंगनबाड़ी दीदी कमला, नर्स सुलेखा और गांव की मितानिन दीदी को देती हूँ।
संचालक -  ओ हो.....इतने सारे लोगों को आप श्रेय देंगी।
रचना -    जी हाँ, दरअसल इन सबके मिले जुले प्रयासों के कारण ही ये संभव हो पाया है।
संचालक -  आपकी बातें बड़ी रोचक लग रही हैं। रचना जी निश्चित ही आपके मन में बहुत सारी बातें होंगी। हमारा आपसे निवेदन है कि आप अपनी बातें हमें विस्तार से बताइये। क्यो साहबान सुनना चाहेंगे रचना जी की कहानी उन्हीं की जुबानी।    (तालियाँ)

रचना -    मैं...मैं...कहाँ से शुरू करूँ.....
संचालक -  हाँ हाँ...कहिये कहिये...
रचना -    .......थोड़ा पहले से शुरू करूँ........हाँ....तब जब मैं अल्हड़ सी रचना गाँव में दौड़ती भागती लोगों को हैरान-परेशान कर दिया करती थी

फ्लैश बैक.......
माँ -     क्यों रचना, ये चुन्नी में क्या बांध रख है तूने और तू आ कहाँ से रही है? ये...ये चोट कोहनी में कैसे लगी?
रचना -   आम हैं माँ, कच्चे आम। वो गंगू चाचा की बाड़ी में इत्ते आम लगे हैं, इत्ते आम लगे है एक पत्थर मारो, चार गिरते हैं...खूब सारे आम तोड़े।
माँ-       तू अकेले गंगू की बाड़ी में आम....
रचना -    अकेले नहीं माँ रामू था...घासी था...जमना थी...शांति थी...फजल और सुरेश और राधे भी था।
                         
रचना -    फिर सही उम्र में मेरी शादी की गई। माता पिता की जिद थी कि 18 साल से पहले मेरी शादी नहीं करेंगे और मेरी खुशनसीबी थी कि मुझे एक सुलझे हुये पति मिले।

फ्लैश बैक......
(शहनाई...., मंत्रोच्चार आदि की आवाजें)
पति-     जानती हो रचना मैं खुद स्वास्थ्य केन्द्र गया था और बर्थ स्पेसिंग याने बच्चों में अंतर आदि के बारे में सारी जानकारी और उसके उपाय सब समझे हैं मैंने। तुम बिल्कुल चिंता मत करो।
                          
रचना -  जब गोलू पेट में था मेरी सासू माँ, यानि सबकी गौरी काकी, मेरी बहुत देखभाल करती थीं। जो जो आंगनबाड़ी दीदी, मितानिन या नर्स दीदी कहतीं वो सब करती थी और मुझसे करवाती थीं।

फ्लैशबैक-
सुलेखा -   गौरी काकी-गौरी काकी...अपने कुलदेवता को प्रसाद चढ़ा दो। रचना माँ बनने वाली है।
सास -    सच...हे भगवान...मेरी बरसों की इच्छा पूरी हो गई...........................
कमला -   आओ तुम्हारा पंजीयन कर दें।
सास -    पंजीयन.....? वो क्यों?
कमला -   पहली तिमाही में प्रत्येक गर्भवती का आंगनबाड़ी में पंजीयन करवाने से माँ के स्वास्थ्य की लगातार जाँच भी होती है और जरूरी दवाएँ और सलाह मिलती रहती है। .......................
कमला -   रचना को डाँट के बोलना कि दोपहर में दो घंटा आराम करे।
सास -    ऐसा...ठीक है मैं उसे दो घंटे बिस्तर से उठने ही नहीं दूंगी।
कमला -   और गौरी काकी, उसे एक अतिरिक्त भोजन भी करवाना - वो मना करेगी पर जिद करके उसे एक बार एक्सट्रा खाना खाने को कहना।
सास -     क्यों वो क्यों।
कमला -   बच्चा क्या खायेगा जो पेट में और आपको दादी दादी कह कर बुलाने वाला है, उसे भी तो कुछ चाहिये, वो भूखा रहेगा क्या।
सास -    ऐसा...रचना को को तो मैं एक डाँट लगाऊँगी तो वो दो बार एक्स्ट्रा खायेगी।
                    
रचना -    दलिया तो मुझे खाना ही पड़ता था और आयरन की गोलियाँ भी । बीच बीच में नर्स दीदी  से परीक्षण भी होता रहा और प्रसव की तैयारी भी।

फ्लैशबैक-
कमला-    ये अपनी दाई है ना - प्रशिक्षित भी है और अनुभवी भी। ये सब संभाल लेगी, क्यों कुन्ती। बस मुझे जगह याने कमरा दिखाओ, प्रसव का सारा समान दिखाओ और बाद में फिर रचना  बहू से मिलवा देना। आप आइये - 
दाई -   वाह कमरा तो बढ़िया है -रोशनी अच्छी है -हवादार है -और बाकी क्या व्यवस्था कर रखी है आपने ।
सास-    ये नया बढ़िया साबुन है - बहुत मंहगा है 14 रूपये का- और नया धागा-ये सफेद ही लिया दीनू ने मैने तो - कोई रंगीन धागा और ब्लेड

रचना- फिर अपने साथ ढ़ेर सारी खुशियाँ ले के गोलू इस दुनिया में आया।

फ्लैशबैक-
(बच्चे की रोने की आवाज)
                          
और मेरी सास और गौरी काकी तो बस उसी की होकर रह गई उन्होंने गोलू के देखभाल में कोई कसर नहीं छोड़ी सारे टीके समय पर लगवायें और मुझे नियमित रूप से सम्पूर्ण आहार देती रहीं है।                           

फ्लेश बैक
सास-    रचना गोलू की मालिश हो गई
रचना-   जी माँ जी
सास-    उसे नहला दिया
रचना-   जी माँ जी
सास-    और उसे दूध पिलाया
रचना-   जी माँ जी
सास-    तूने खाना खाया
रचना-   जी माँ जी।
सास-    वो अतिरिक्त वाला खाना खाया थोड़ा और ज्यादा खाया तुझे अपने और गोलू दोनों का ख्याल रखना है।
रचना-   जी माँ जी।
सास-    फल वगैरह खाया।
रचना-   जी माँ जी।
सास-    जी माँ जी, जी माँ जी, ला गोलू को मुझे दे।
रचना-   जी माँ जी।
सास-    अले गोलू जा तैयार हो।
रचना-   वो क्यों माँ जी।
सास-    अरे आज कौन सा दिन हैं।
रचना-   मंगलवार।
सास-    तो आंगनबाड़ी केन्द्र नहीं जाना है.........आज तो तुझे बुलाया गया है ना वहां गोलू को टीका लगाना है।
                      
सुलेखा -    हाँ गौरी काकी और बच्चों को जो भी खिलाना चाहो वो माँ को खिलाओ। बच्चा दूध से उन पौष्टिक और अच्छी चीजों को ले लेगा।
सास -    ऐसा-चल रचना तू घर चल और आम खा। मुझे गोलू को आम खिलाने की इच्छा हो रही है। चल, जल्दी चल।
                         
रचना-    सासु माँ यानि सब से प्यारी गौरी काकी जुबान की थोड़ी तेज जरूर थी पर हम माँ बेटे का बहुत ख्याल रखती थी। थोड़ी डाँटती जरूर थी लेकिन मेरी और गोलू की सारी जरूरतें नर्स दीदी या आंगनबाड़ी दीदी से पूछ-पूछ कर करती थी।

फ्लैशबैक-
सास-      दलिया नहीं दवाई है, दूध की मलाई है
मितानिन-  सच में दलिया दवाई है जो बच्चों के लिए और स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए जरूरी है।
कमला-     इसमें प्रोटीन होता है और धात्री के कमजोरी को भी दूर करता है उसके लिए आवश्यक दूध बनाने में भी सहायक होता है।
सास-    हाँ रे,
कमला-   हाँ लेकिन आप अपने बहू के लिए दलिया जरूर ले जाना और पहले की तरह इसे बराबर
सास-     बराबर -बराबर हिस्सों में बाँट कर रोज रचना को खिलाना ठीक
कमला,सास-  हा.....हा..हा...हा..हा
मितानिन-    कहाँ चली गौरी काकी
सास-        रचना की दवाई या यूँ कहो मलाई लेने।
                           
रचना-     फिर गोलू बढ़ता गया, गौरी काकी यानि मेरी प्यारी माँ जी आंगनदीदी मितानिन, सुलेखा नर्स और गोलू के पापा सब का लगातार सहयोग और स्नेह, मुझे और गोलू को मिलता रहा और आज मैं ये इनाम इन सबको समर्पित करती हूँ।  (तालियाँ)

संचालक-    रचना जी आपकी कहानी ने दिल को छू लिया आप की कहानी ये सिद्ध करती है कि थोड़ी सी समझदारी और देखभाल जानकार लोगों का सलाह और योजनाओं का लाभ हर माता और शिशु को स्वस्थ भविष्य दे सकती है, हम उम्मीद करते है कि हर गांव में रचना जी जैसी स्वस्थ माता हो और गोलू जैसे स्वस्थ शिशु हो, रचना जी आपके और आपके गोलू को एक बार फिर बहुत-बहुत बधाईयाँ और शुभकामनाएँ।

Wednesday, December 15, 2010

रेडियो धारावाहिक रचना - 8

एपिसोड नंबर 8
अन्नप्राशन
रचना नाटिका के सातवें एपिसोड में आपने सुना कि चना के बच्चे गोलू को डी.पी.टी. के तीनों टीके, बी.सी.जी. का टीका लग गया और खसरे का टीका नवमें महिने में लगेगा। लेकिन गोलू हुआ है अभी 6 महीने का और अब तक सिर्फ माँ का दूध पी रहा है। और आज हो रहा है गोलू का अन्नप्राशन और आज से गोलू का अन्न खाना शुरू होगा। गोलू के जीवन में एक नयापन और एक नया एहसास, अब उसको नये-नये स्वाद मिलेंगे और ढ़र सारे पोषक तत्व जो उसके विकास के लिए अब बेहद जरूरी है, तो चलें गोलू के अन्नप्राशन पर।

Get this widget | Track details | eSnips Social DNA

सास -    रचना, दीनू अभी तक दीदी को लेकर नहीं आया - बस तो आ चुकी होगी।
रचना -   आते होंगे, बस कभी कभी लेट भी तो हो जाती है।
सास -    सुसरी बस को आज ही लेट होना था। एक तो तेरी शादी के बाद अब आ रही है मेरी दीदी, तेरी मौसी सास, उनसे मिलने की बहुत इच्छा हो रही है। कुछ आवाज आई.....देख तो आ गये क्या?
रचना -    आते ही होंगे माँजी, थोड़ा इंतजार ही तो करना है।
सास -    अरे इस इंतजार ने तो परेशान कर दिया । दीनू को गये इतनी देर हो गई, ला गोलू को दे टाइम पास हो जायेगा।
रचना -   गोलू अभी सो रहा है माँ आप आप मुझे डाँट कर टाईम पास लीजिये, गोलू को अभी सोने देते है ।
सास -    अभी मेरा मूड अच्छा नहीं है तुझे डाँटने की इच्छा नहीं हो रही है -वैसे तू ठीक कह रही है रचना गोलू को सोने दे। अन्नप्राशन के समय इसे काफी देर तक लोग जगा के रखेंगें-पर देख तू इसे बीच-बीच मे समय पर दूध पिलाते रहना बहुत जरूरी है ।
रचना -    जी माँ जी -अब आ गए शायद -हाँ - वही है माँजी आपकी दीदी आ गई -मासी सास आ गई।
सास-      आओ -दीदी -कब से इंतजार कर रही हूँ आपका -रचना चल पैर छू इसके बहुत इंतजार करवाया -
रचना-    पाँव लागू मासी
सास की दीदी -क्या बताऊँ गौरी -बस पंच्चर हो गई थी।
सास-       ये मुई बस भी तभी खराब होती है जब उसमें मेरा कोई रिश्तेदार आ रहा होता है। ये सब छोड़ो पहले ये बताओ कि दीदी को पानी वानी पिलाओगी कि नहीं।
सास-       क्यों नहीं दीदी - रामू रामू ए रामू
रामू -       जी -
सास-       अरे दीदी को शर्बत पिलाओ -जल्दी अरे शर्बत नहीं सिर्फ पानी - और रामू ।
मासी -      मटके का पानी मत देना - वैसे ही गला कुछ ठीक नहीं है और गोलू कहाँ है उसको जी भर के देख तो लूँ ।
सास -   उसकी पैदाइश मे तो तुम नही आ पाई थी ।
रामू -    लाजिए पानी
मासी-    लाओ बेटा जुग जुग जियो ,,,,,,,,,,,,,,,,,वाह,,,,,,,, अपना गोलू तो बहुत संुदर है, बिल्कुल दीनू पर गया है ।
सास -   मुझे तो रचना के समान दिखता है हो सकता पर नाक तो दीनू की ही है।
सासी -  अच्छा ये बताओ कार्यक्रम क्या है......मैं तो गोलू के अन्नप्राशन के लिये चाँदी की कटोरी 
और चम्मच लाई हूँ ।
सास-       ऐसा - वैसे कार्यक्रम कुछ खास नहीं रखा है....इसकी छठी मे तो गाँव भर को बुलाया था मुँह जुठाई में हम घर वाले ही हैं......और वो आंगनबाड़ी वाली कमला मितानिन और दो-चार लोग ही रहेंगे।
मासी -    दीदी - तैयारियाँ पूरी हो गई हो गईं ?
सास -    हो गई तैयारियाँ पूरी हैं....गोलू के 6 महीने पूरे होने का इंतजार था सो खत्म हुआ।
दीनू -     इस पाँच तारीख को ही 6 महीने पूरे हुये हैं गोलू के और आज का मुहूर्त निकला है और मासी जी आप का सामान ऊपर के कमरे मे रख दिया है। अरे रामू मासी जी को चाय पानी करवाया।
रामू -     चाय चढ़ गई है बस ला रहा हूँ ।
पति -     हाँ जल्दी ला ।
मासी -     कोई जल्दी नहीं है - गोलू को नहला धुला कर तैयार करो -मैं भी स्नान ध्यान कर लू चाय बाद में ले लूँगी - चल रामू मुझे मेरे कमरे मे ले चल ।
-    -    -    -    -    -    -    -    -    -    -    -    -    -    -    -    -

कमला -     हाँ गौरी काकी - खीर ही खिला ही खिलाओ गोलू को पर अच्छी तरह मथी मसली हो
और बस एक चम्मच ही उसके लिये.....................
मितानिन - और जिनसे खिलाओगे गोलू को वो बर्तन अच्छे साफ होने चाहिए..........
सास-     हाँ .............हाँ.............गोलू तो चाँदी के बर्तन में खाना खाने वाला है.......मेरी दीदी उसके लिये चाँदी की कटोरी और चम्मच लाई हैं............बहुत महंगे होते है चाँदी के बर्तन
मितानिन-     बस उन्हे अच्छे से साफ करवा लीजियेगा।
रचना -     लीजिये मासी गोलू को - नहला घुला कर तैयार कर दिया है ।
मासी -     अरे इसे नजर ना लगे - कितना प्यारा और स्वस्थ है ।
कमला -     ये सब गौरी काकी के कारण है - उन्होने गोलू को सभी टीके समय पर लगवाए उसक खूब ख्याल रखा रचना को पौष्टिक आहार दिया जिससे गोलू को पौष्टिक दूध सही मात्रा में लगातार मिलता रहा ..............
मितानिन - इसलिये गोलू सुन्दर होने के साथ-साथ स्वस्थ और मस्त है।
कमला -     हाँ- और बेचारी फुलकुँवर को देखो ।
मितानिन - काहे की बेचारी......... बेवकूफ है वो................
सास -     क्यों क्या हुआ उसको
कमला -     उसे कुछ नहीं हुआ उसके बच्चे को हुआ है ।
रचना -     क्या हुआ छोटू को ?
कमला -     ढेर सारी बीमारियाँ हो गई हैं उसे सीरियस है...............अस्पाताल ले गए हैं वैसे रचना मुश्किल है
रचना -      हे भगवान...................
मासी  -     कितना बड़ा है छोटू
रचना -     गोलू के बराबर ही है करीब- करीब 8-10 दिन का अंतर है......पर वो थोड़ा कमजोर था
मासी -     क्यों माँ ने खान-पान पर ध्यान नहीं दिया क्या।
कमला -     खान-पान पे ध्यान - अरे उसने उस समय आयरन गोलियाँ तक नहीं खाई - माँ और
               सुलेखा नर्स इतना उसको बोलते रहे पर नहीं मानी ।
मासी -     घर वालों ने उसे समझाया नहीं।
कमला -    अरे घर में हमारी गौरी काकी जैसी सास कहाँ होती है-भले ऊपर से कठोर हो पर रचना
           का पूरा ख्याल इन्होने रखा सब चीजे समय पर करवाती रहीं।
मितानिन -  फुलकुंवर ने तो डी.टी.पी. वाले टीके भी छोटू को अभी तक नहीं लगवाए।
मासी -     तभी - तभी वो बच्चा बीमार हुआ टीके तो बहुत जरूरी हैं बच्चे के लिये इससे बहुत से
बीमारियों की रोकथाम होती है टीके तो बच्चे को लगवाने थे, फुलकुंवर ने गलत किया ।
कमला -     ऊपर से पैसे जोड़े नहीं थे - अब जरूरत पड़ी तो महाजन से ऊँचे ब्याज पर पैसे उठा लिये - वो कर्जा चढ़ा सो अलग ,,,,,
मासी -     क्यों महाजन से पैसे ब्याज पर क्यों लिये यहाँ स्वसहायता समूह नहीं है क्या
मितानिन -     है -- बिल्कुल हैं
मासी -     तो वहाँ से क्यों सहायता नहीं ली ।
कमला -    वो सदस्य ही नहीं बनी कितना समझाया उसे पर नहीं मानी ।
मासी -     क्यों गौरी तू तो स्व सहायता समूह में है ना ।
सास -     हाँ, शुरू से सदस्य हूँ , हम बारह महिलाओ का समूह है हर महीने 40 रूपये जमा करते
हैं हम ।
मितानिन - लोग पैसे जोड़ कर बैंक में जमा करवा रहे है और जब किसी सदस्य को जरूरत हो तो उसे कम ब्याज पर उधार दे देते है 13000 जमा हो चुके है इनके ।
मासी -     ये तो बहुत अच्छा है गौरी और रचना को इससे जोड़ा कि नही ।
सास -     अब तो फुर्सत मिली है बेचारी को - गोलू का अन्नप्राशन आज हुआ और कल रचना को
इसका सदस्य बनवाती हूँ ।
रामू-      ये रही कटोरी और ये रही चम्मच, और ये है मथी, मसली खीर।
मासी -    लाओ भई लाओ - गोलू को माँ की गोद मे बिठाओ और गौरी तुम अपने हाथों से गोलू
को मुँह जूठा कराओ ।
कमला -   लो आज गोलू ने पहली बार अन्न चखा 6 माह बाद, पूरे सातवें महीने में ।
सास -     कितना खुश हो रहा है, और चाहिये ले.......थोड़ा और ले......बढ़िया .......बहुत बढ़िया।
रामू -     सब तैयार है - ये रही कटोरी और ये चम्मच और ये रही मथी मसली खीर ।
दीनू -    मेरे पास आ - अरे - वाह ये तो मुस्कुरा रहा है - शायद समझ गया कि ऐ-ऐ फिर सू 
         सू कर दिया ।
सास -   हाँ- समझ गया कि तेरी गोद में है - दीदी पता नहीं ये अपने बाप की गोद को क्या
         समझता है - दीनू के पास गया नहीं कि सूसू कर देता है - रचना सूखी-साफ लंगोटी
         ला - लंगोटी बदल दे इसकी ।
कमला -  अब से रोज गोलू को ऊपरी आहार देना - लेकिन पहले रचना दूध पिलाए - फिर उससे
बाद अच्छे से हाथ धोकर कटोरी चम्मच से केला -चावल दाल कुछ भी अच्छे से मथ कर मसल कर गोलू को खिलाना ।
मितानिन - और उसको एक चम्मच तेल डालना मत भूलना ।
कमला -  हाँ - चिकनाई भी जरूरी है अब गोलू के लिये और याद रहे अब उसका वजन अगले महीने तक 500 ग्राम बढ़ जाना चाहिये ।
मासी -   और भगवान ना करे अगर हल्का - फुल्का बीमार पड जाए गोलू तो, स्तनपान जारी
         रखना - तरल भोजन देते रहना और बीमारी के बाद ज्यादा दूध पिलवाना ।
दीनू -   और भी क्या हाल है रचना सब समझ ले, यहाँ कई अच्छे सलाहकार बैठे है सारी बातें अच्छे से समझ ले......।
सास -  और तू भी अच्छे से एक बात समझ ले ।
दीनू -  क्या ?
सास -  तू इसे बड़ा होने तक गोद मे मत लेना ।
दीनू -  क्यों
सास -  ये तेरी गोद का.............समझता है - उठाएगा तो तेरी गोद मे सुसु कर देगा ।

Monday, December 13, 2010

रेडियो धारावाहिक रचना - 7

एपिसोड नंबर 7
बच्चे का 2 से 6 महीने तक का होना

सूत्रधार 1 -  रचना धारावाहिक में आगे क्या हुआ होगा तो चलो सुनते है रचना के परिवार में क्या हो रहा है।

Get this widget | Track details | eSnips Social DNA

सास -     रचना
रचना -    जी माँ जी
सास -     गोलू की मालिश हो गई
रचना -    जी माँ जी
सास -     उसे नहला दिया
रचना -    जी माँ जी
सास -     उसे दूध पिलाया
रचना -    जी माँ जी
सास -     तूने खाना खाया
रचना -    जी माँ जी
सास -     वो अतिरिक्त वाला खाना खाया। थोड़ा अधिक खाया कर तुझे अपने और गोलू दोनों का
          ख्याल रखना है।
रचना -    जी माँ जी
सास  -    फल वगैरह
रचना -    जी माँ जी
सास -     जी माँ जी, जी माँ जी - हैं - ला गोलू को मुझे दे।
रचना -    जी माँ जी
सास -     अले ले गोलू - मेरा गोलू - और तू यहाँ खड़े खड़े क्या कर रही है। जा तैयार हो, .. 
          और जल्दी तैयार हो।
रचना -    जी माँ जी...वो क्यों माँ जी।
सास -     क्यों माँजी ? अरे आज कौन सा दिन है।
रचना -    मंगलवार।
सास -     तो आंगनबाड़ी केन्द्र नहीं जाना है - हैं - आज तो बुलाया गया है ना वहाँ - गोलू को           टीका लगना है।
रचना -    जी माँ जी
सास -     जी माँ जी - सारी बातों का ध्यान मैं ही रखूँ। तुम लोग तो बस..जा जल्दी तैयार होजा।
रचना -    जी माँ जी।
            --        --        --        --        --
कमला -    आओ गौरी काकी, कैसी हो और हमारा गोलू.....वाह वजन तो बढ़ा है इसका।
सास -    बढ़ेगा क्यो नहीं - तुमने जो जो बोला था वही किया मैंने ....दिन में 7-8 बार दूध पिलवाती हूँ इसे रचना से और रचना को जो जो तुमने बोला था सब खिलवाती हूँ।
कमला -    ऐसा - तो सब खा रही है रचना।
सास -     अरे खायेगी कैसे नहीं - एक डाँट लगाऊँगी तो इसका पति भी खायेगा, क्यों रचना।
रचना -    जी माँ जी।
सास -     तुम तो कमला बस बताती जाओ क्या क्या करना है। बाकी मैं सब संभाल लूंगी।
सुलेखा -   आज तो अभी इसे डी.पी.टी. का पहला टीका लगवाना है। गोलू तो डेढ़ माह हो गया है।
रचना -    हाँ परसों ही डेढ़ माह पूरे हुये हैं।
कमला -   बहुत अच्छा - लाओ गोलू को दो। सुलेखा इसका वजन तो करो और टीका निकालो।
रचना -    गोलू को तकलीफ तो नहीं होगी ना - बहुत छोटा है अभी।
सुलेखा -   अरे इसे तो पता भी नहीं चलेगा। थोड़ा सा रोएगा जरूर पर परेशानी की बात नहीं है। रही बात इसके छोटे होने की तो सभी बच्चों को डी.पी.टी. का पहला टीका डेढ़ माह की उम्र में ही लगता है। सभी बच्चों को लगता है और सभी को लगवाना भी चाहिये।
सास -    लेकिन क्यो इससे क्या होगा।
कमला -   इससे गोलू की गलघोंटू, काली खाँसी और टिटनेस की रोकथाम होगी। बहुत जरूरी है ये टीका।
रचना -    अच्छा लेकिन बाकी दो टीके कब लगेंगे।
सुलेखा -    दूसरा टीका इसे एक माह बाद डाई माह की उम्र में लगेगा और तीसरा टीका तब जब गोलू साढ़े तीन माह का हो जायेगा।
कमला -    और रचना भूलना मत, ये टीके बच्चे के स्वास्थ्य के लिये बहुत जरूरी हैं। इसे एक माह बाद ले ही आना।
सास -     भूलेगी कैसे-हैं-क्यों रचना भूलेगी तू।
कमला -   नहीं माँ जी।
सास -     तो कमला - इसे एक महीने बाद - ठीक एक महीने बाद - ढाई माह के गोलू को टीका           लगवाने मैं खुद आऊँगी। चलो रचना।
कमला -   ठीक है माँ जी । पर इसे सिर्फ दूध ही देना - रचना को अच्छे से खिलाना पिलाना और           गोलू को सिर्फ माँ का दूध देना। माँ के दूध में विटामिन ए, प्रोटीन और दूसरी पौष्टिक चीजें होती हैं जो बच्चे को स्वस्थ और मजबूत बनाती हैं।
सुलेखा -    हाँ गौरी काकी और बच्चों को जो भी खिलाना चाहो वो माँ को खिलाओ। बच्चा दूध से उन पौष्टिक और अच्छी चीजों को ले लेगा।
सास -    ऐसा-चल रचना तू घर चल और आम खा। मुझे गोलू को आम खिलाने की इच्छा हो रही है। चल, जल्दी चल।
रचना -    जी मां जी।
                    --        --        --        --
दीनू -    कैसा सिर दर्द है माँ।
सास -    ठीक है अभी तो हल्का हल्का दर्द है।
दीनू -    ये लो दवाई - सुलेखा नर्स ने भेजी है।
सास -    अरे मुझे इन गोलियों की जरूरत नहीं है। मैं ऐसे ही ठीक हो जाऊँगी।
दीनू -    ऐसा कैसे चलेगा - लो ये गोलियाँ खाओ।
सास -    बहुत जिद करता है रे तू - ला दे - पर पहले ये तो बताओ गोलू को वो दूसरा टीका लगा कि नहीं।
दीनू -    हाँ लग गया - पर माँ तुम भी - अरे गोलू-रचना का ही ख्याल रखती रहोगी - थोड़ा     अपना भी ख्याल करो, आराम किया करो।
रचना -    माँ जी आपके पैर दबा दूँ।
सास -    पैर में दर्द नहीं है, सर में दर्द है। सर दबा।
रचना -    जी।
सास -    गोलू रोया तो नहीं टीका लगवाते समय।
रचना -    थोड़ा सा रोया था, पर तुरंत ही चुप हो गया था।
सास -    हाँ - अब टीके लगाना बहुत जरूरी है। नहीं तो मैं गोलू को जरा भी रोते हुये नहीं देख  सकती।
रचना -    हाँ माँ जी, नर्स दीदी बता रही थीं कि ये टीके गोलू के लिये बहुत जरूरी हैं।
सास -    हाँ - और तू तीसरे टीके का दिन भूलना मत। एक महीने बाद पहले मंगलवार को गोलू  को ले जाना। हाँ थोड़ा ऊपर की तरफ दबा - आधे सिर में दर्द है और गोलू कहाँ...है
रचना -    अपने पापा के पास।
सास -    तो फिर दीनू की आवाज आती ही होगी।
दीनू -    रचना ...ए रचना.....गोलू ने फिर मेरे ऊपर सू सू कर दी। जल्दी आओ।
सास -    देखा - मैंने कहा था ना आवाज आती होगी। अब पता नहीं गोलू अपने पापा की गोद को क्या समझता है। जा तू जा और सुन- अपना खाना पूरा खाना - वो...अतिरिक्त भोजन.. और फल भी....और मेरे पास वो रामू को भेज दे।
रचना -    जी माँ जी...और आप दवाई खा लीजियेगा।
                    --        --        --        --
दीनू -    गोलू ......
रचना -   अब निकलिये ना आप को देर हो जायेगी।
दीनू -    बस एक मिनट - ऐ गोलू...गोलू......गोलू मैं जाऊँ काम पे। वैसे तू बोलेगा नहीं जाऊँ तो          नहीं जाऊँगा।
रचना -   वो क्या बोलेगा साढ़े तीन महीने का बच्चा। गोलू को मुझे दीजिये और आप काम पर          जाइये। काम का नुकसान नहीं होना चाहिये।
दीनू -    जा रहा हूँ भई जा रहा हूँ, एक बार और गोलू को..
रचना -   बस का समय निकला जा रहा है। आप जाइये ना।
दीनू -    बड़ी बेदर्दी से भगा देती हो भई।
रचना -   आऽऽऽप जाइये। जाइये ना। माँ आती होगी आज मंगलवार है और गोलू को तीसरा  डी..पी.टी का टीका लगवाना है। आती ही होगी माँ जी, आप जाइये ना।
दीनू -    जा रहा हूँ - भई जा रहा हूँ - एक बार।
सास -    बहू तैयार हो हो गई।
रचना -   बस एक मिनट माँ जी।
दीनू -    मैं चला।
सास -    घंटे भर से तैयार हो रही है। कितना सजेगी संवरेगी। अरे सिनमा विनेमा नहीं चलना है।
आंगनबाड़ी केन्द्र चलना है समझी, जल्दी आ।
रचना -    चलिये माँ जी।
सास -    चलो....और गोलू  को मुझे दे...मैं पाऊँगी उसे....
रचना -    जी....माँ जी....लीजिये।
                --                --            --
सास -     और मितानिन कैसी हो।
मितानिन - आओ गौरी काकी आओ बिल्कुल समय पर आ गई।
सास -     गोलू की सेहत की बात है ना मितानिन।
सुलेखा -    ये तो बहुत अच्छी बात है और रचना इस बीच गोलू को कोई परेशानी तो नहीं हुई।
रचना -     नहीं नर्स दीदी।
सुलेखा -    तब ठीक है - आओ पहले गोलू का वजन कर लें।
रचना -     अब की बार तो आखिरी टीका लगेगा ना।
सुलेखा -    डी.पी.टी. का आखिरी टीका है साथ में इसे पोलियो से बचने के लिये दवा की खुराक भी लेकिन आओ एक टीका इसे 9 माह की उम्र में और लगेगा।
सास -    वो किस चीज के लिये।
सुलेखा -   खसरा - खसरे से बचाव का टीका - जो इसे करीब साढ़े पाँच महीने बाद 9 महीने के  बाद लगेगा। चलो अंदर चलो इसे डी.पी.टी. का आखिरी टीका और पोलियो की खुराक दे दें।
मितानिन - और सुनाओ गौरी काकी गोलू ने तो आपको व्यस्त कर दिया होगा।
सास -    हाँ पूरे घर को दौड़ा रखा है गोलू ने - दीनू तो काम पर जाने से बचता है सिर्फ गोलू के साथ खेलने के लिए और मैं मैं तो....................
कमला -  नमस्ते गौरी काकी कब आई
सास -    अभी थोड़ी देर हुई है
कमला -  गोलू को तीसरा टीका लग रहा है... अच्छा है
सास -    हाँ देखो हमने बराबर समय पर गोलू को टीका लगवाया
कमला -  ठीक किया- आपने सुना है फूलकुंवर ने अपने बच्चे को टीका लगवाने से मना कर दिया- न जाने किसने कान भर दिए वैसे मैं जाऊँगी उसके पास समझाने-खैर तुम्हारा गोलू तो गलाघोंटू,  कालीखाँसी और टिटनस से सुरक्षित रहेगा ( बच्चे के रोने की आवाज़)
सुलेखा -  अले ले ले चलो ठीक हो जाएगा बस बस............
सास -    लो लग गया टीका गोलू को
मितानिन - हाँ बहुत सी बीमारियों से सुरक्षित हो गया आप का गोलू
कमला -   आओ रचना - तुम्हारे क्या हाल है खाना खुद से खा लेती हो कि गौरी काकी की डाँट सुन के खाती हो
रचना -    जी जी
सास -    नहीं अब डाँट खाए बिना भी अच्छे से खा लेती है। मैं भी सोच रही थी डाँट ज्यादा खा लेगी तो खाना ज्यादा नही खा पाएगी सो मैंने भी इसे डाँटना कम कर दिया है - बस मन बहलाव के लिए डाँट लेती हूँ इसे
कमला -    अच्छा रचना दलिया तो रोज़ खा रही हो ना
रचना -    जी दीदी
मितानिन - हाँ दलिया बिल्कुल बंद मत करना और गौरी काकी आप ध्यान रखना कि दलिया सिर्फ रचना ही खाए और कोई इसे ना खाए।
सास -    हाँ हाँ कमला पहले बता चुकी है घर में और कोई दलिया नहीं खाता सिर्फ रचना के लिए ही दलिया बनता है
कमला -    ये जरुरी भी है गौरी काकी - तुमने तो वो नारा सुना ही होगा
सास-    कौन सा नारा,
कमला-     दलिया नहीं दवाई है, दूध की मलाई है।
सास-    हाँ-हाँ
मितानिन-    सच में दलिया दवाई है जो बच्चों के लिए और स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए जरूरी है।
कमला-     इसमें प्रोटीन होता है और धात्री के कमजोरी को भी दूर करता है उसके लिए आवश्यक
दूध बनाने में भी सहायक होता है।
सास-    हाँ रे, यहाँ सिर्फ रचना को ही दूध खिलाया जाता है।
मितानिन-    ये तो अच्छी बात है पर यहाँ तो सभी परिवार इसका उपयोग करते है कुछ लोग तो इसे आटा बनवा लेते है।
कमला-     अब ये नहीं चलेगा मितानिन, क्योंकि अब दलिया पिसा कर आटा बनवानें पर दण्ड का
प्रावधान किया जा रहा है, पिसाने वाले और पिसने वाले दोनों ही दण्डित होंगे।
मितानिन-    ऐसा
कमला-     हाँ, 150 सौ से लेकर 200 तक जुर्माना भी हो सकता है। ग्राम पंचायत में ये प्रस्ताव करवाया जा रहा है,
सास-    जिसके लिए जो चीज जरूरी है, वही खाये बाकी कोई क्यूं खाये।
कमला-     हाँ लेकिन आप अपने बहू के लिए दलिया जरूर ले जाना और पहले की तरह इसे बराबर
सास-    बराबर -बराबर हिस्सों में बाँट कर रोज रचना को खिलाना ठीक
कमला,सास-    हा.....हा..हा...हा..हा
मितानिन-    कहाँ चली गौरी काकी
सास-    रचना की दवाई या यूँ कहो मलाई लेने।

Saturday, December 11, 2010

रे‍डि‍यो धारावाहिक रचना-6

एपिसोड नंबर 6
बच्चे का 1 महीने तक का होना

सूत्रधार-1    रेडियो धारावाहिक रचना के 5 एपिसोड़ आप सुन चुके हैं जिसमें रचना कि कहानी उसकी  किशोरावस्था से शुरू हुई थी, और पिछले एपिसोड में वह एक स्वस्थ शिशु कि माँ भी बन चुकी है। पहले एपिसोड में आपने जाना कि किशोरावस्था और उम्र का नाजुक दौर किस तरह से खतरनाक हो सकता है, और कम उम्र में शादी के क्या दुष्परिणाम हो सकते है। दूसरा एपिसोड रचना कि शादी की सही उम्र से जुड़ा हुआ था, जिसमें गांव की आंगनबाड़ी और महत्वपूर्ण सुविधाओं के साथ, बच्चों के बीच अंतर रखने की जानकारी से भी आप अवगत हुए। तीसरे एपिसोड में गर्भावस्था के दौरान कौन-कौन सी सावधानियाँ रखनी चाहिएँ और गांव तथा आंगनबाड़ी की दीदी, नर्स, अन्य रिश्तेदारों की महत्ता को समझाया गया, चौथे एपिसोड में गर्भावस्था के अंतिम चरण की सावधानियां, खतरे की पूर्व जानकारी, गर्भावस्था के पूर्व तैयारियों के बारे में रचना की कहानी में आप ने सुन, और पांचवे एपिसोड  में प्रसव के दौरान आने वाली समस्या, जानकारी और रचना की एक स्वस्थ शिशु की माँ बनने की कहानी, रोचक प्रंसगों के साथ आपके द्वारा सराही गई। आज रचना के घर छठी मनाई जा रही है, तो चलें हम और आप वहाँ मिठाई खाने।



(महिलाओं की भीड़नुमा आवाज़ें, रामू की आवाज़ नाश्ते के लिए, म्यूज़िक लाउडस्पीकर से गाने की)
1 -        सुना है रचना का लड़का बहुत सुंदर है
2 -        तूने देख लिया क्या
1 -        आज तो छठी है - इंतज़ाम तो अच्छा किया है दीनू ने
3 -        वैसे दीनू है अच्छा लड़का
1 -        और रचना क्या बुरी है - वो भी दीनू से कहीं भी कम नहीं
3 -        सबसे बढ़िया तो ये लगा कि रचना के आने के बाद अपनी गौरी काकी बदल गई
1 -        हाँ नहीं तो इतना खर्चा वो करतीं
2 -        अरी वो कहाँ खर्च कर रही है दीनू ने काफी पैसे जोड़ लिए हैं
3 -        लगता है गाँव भर को न्योता दिया है
2 -        चलो हम भी चले अंदर
3 -        अरे अभी अंदर ज्यादा लोग है, कुछ कम हो जाए तो चलें
1 -        लो फूलकंवर आ रही है - लगता है वो बच्चे को देख आई
2 -        आओ फूलकंवर कैसा है बच्चा
फूल-       बच्चा तो अच्छा है - बिल्कुल रचना के नैन नक्शे हैं उसके
1 -        अच्छा और वजन कैसा है
फूल-       वो तो पता नही देखने में तो अच्छा स्वस्थ है -बता रहे थे कि 3 किलो वज़न है उसका
2 -        क्यों तूने उसे गोद में उठा के नहीं देखा।
फूल-        कहाँ -बच्चे को तो मच्छरदानी से ढँक दिया है। गौरी काकी किसी को भी बच्चे को हाथ नहीं लगाने दे रही -बोलती है - दूर से ही देखो ......गोदी मे लेने से प्यार से संक्रमण हो सकता
है- अब बाहर से ही बच्चे को देखा और चलो।
2-        ऐसा तो क्या मतलब - चलो नाश्ता पानी करो और चलो।
1-        अरे नहीं -गौरी काकी तो बहुत समझदारी का काम कर रही हैं।
2-        क्यों -इसमें क्या समझदारी -हम उसे गोदी पा लेंगे तो क्या उसे कुछ हो जाएगा।
नर्स -     हाँ - हो भी सकता है, अगर हाथ साफ न हो।
1-        अरे नर्स दीदी आप, नमस्ते --
नर्स -     नमस्ते - हाँ फूलकुँवर, संतोषी ठीक कह रही है -अगर बच्चे को सब लोग गोदी लेकर प्यार करेंगे तो उसे तकलीफ भी होगी और संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ जाएगा - इसलिए    बहन बुरा मानने की बात नहीं है -बच्चे को जरूर देखो आशीर्वाद दो और क्योंकि खुशी की बात है तो मिठाई भी खाओ।
1-        बिल्कुल ठीक कह रही हैं आप नर्स दीदी -आप भी छठी में आई हैं।
नर्स-      छठी में भी आना हो गया और बच्चे की जाँच भी कर लूँगी।
2-        ये बहुत अच्छा है वैसे उसका वजन बता रहे हैं कि
नर्स-      करीब 3 किलो है - ठीक है बच्चे का वजन ढाई किलो से ऊपर होना चाहिये 2 किलो से कम होने पर खतरा हो सकता है। पर अपनी रचना का बेटा वजन मे बिल्कुल ठीक है।
2 -       2 किलो से कम वजन में खतरा रहता है?
नर्स-      हाँ -ऐसे में बच्चे को तंरत अस्पताल ले जाना चाहिये।
1-        वैसे गौरी काकी को आपने ही बताया होगा बच्चे को मच्छरदानी में रखना और दूसरों से संक्रमण लगने वाली बात
नर्स-      हाँ क्यों...
फुलकुँवर-  तभी -मै कहूँ ।
2-        कि गौरी काकी इतनी समझदार कैसे हो गई ......................
-    -    -    -    -    -    -    -    -    -    -    -    -    -    -    -    -
रामू-      चलो सब लोग गये, अब जाके फुरसत मिली,
रचना-     तुझ पर बहुत बोझ पड़ गया है ना काम का।
रामू-      अरे नहीं, काहे का बोझ, वो अपने गोली को देखते ही सब काम हो गया,
रचना-     थक गये होंगे, थोड़ा आराम कर लो।
रामू-      आराम तो आप को करना है, गौरी काकी ने पपीता भेजा है इसे खाँ कर आपको सोना है इसे खाइये और थोड़ी देर तक आराम कीजिए। और तब तक गोलू के पास मुझे बैठना है।
रचना-     ऐसा माँ जी ने कहां है।
रामू-      हाँ, अगर उनकी बात नहीं मानेगी तो तगड़ी सी डाँट के लिये तैयार रहना।
रचना-     बाबा रे बाबा, ला पपीता, देख आधा तू खा ले, आधा मैं खा लूंगी
रामू-      और गौरी काकी को पता चल गया तो.....
रचना-     अरे कैसे पता चल जायेगा।
रामू-      उन्हें सब पता चल जाता है, अगर ऐसा हुआ तो आप गई काम से
रचना-     अरे, लेकिन पूरा पपीता मैं कैसे खाऊँ..
रामू-      चलिये थोड़ा सा बचा लीजिएगा, गोलू को दे देंगे,
रचना-     हैय....गोलू को... अरे रामू अभी गोलू कुछ नहीं खा सकता,
रामू-      क्यूं
रचना-     उसके मुहँ में दाँत है क्या
रामू-       नहीं।
रचना-     तो कैसे खायेगा,
रामू-      उसे पपीता मसल कर देगें।
रचना-     नहीं रे रामू अभी 6 महीने तक गोलू को कुछ नहीं देना है। सिर्फ दूध पीना है उसे दूध के अलावा कुछ भी नहीं देना।
रामू-      लेकिन उसे भूख लगे, प्यास लगे, तभी नहीं।
रचना-     नहीं, कमला दीदी बताई थी की 6 महीने तक गोलू को कुछ भी नहीं देना है।
रामू-      और आप तो लीजिए।
रचना-     क्या
रामू-      पपीता
रचना-     अरे, फिर तू पीछे पड़ गया दोनों आधा-आधा
रामू-      कोई आधा नहीं, गौरी काकी बोली थी कि ये आप के लिए बहुत जरूरी है, आप खाइये तब तक मैं गोलू का ख्याल रखूँगा,
रचना-    इतनी बड़ी-बड़ी बातें करता है तू रे,
रामू-     बड़ा तो हो गया हूँ तो बड़ी-बड़ी बातें नहीं करूँगा।
रचना-    चल हट, बड़ा हो गया। तू जा और आराम कर मैं भी खा कर आराम कर लूंगी।
रामू-     और गोलू
रचना-    वो मैं देख लूंगी, वैसे भी वो अभी सो रहा है, 
-    -    -    -    -    -    -    -    -    -    -    -    -    -    -    -    -
पति -   अले लेले - क्या देख रहा है -ए गोलू - रचना देख ये हंस रहा है, तू तो बड़ी तैयार दिख
        रही है कहीं जा रही है क्या।
रचना-    हँस नहीं रहा मुस्कुरा रहा है।
पति-     वैसे इसकी मुस्कुराहट बिलकुल तुम्हारी तरह है कितना अच्छा लगता है मुस्कुराते हुए।
रचना-    हाँ, बहुत अच्छा लगता है लेकिन सुबह से 5 दस्त हो चुके है, दिन भर रो रहा है।
पति-     अरे तो नर्स दीदी को दिखाया।
रचना-    वहीं जा रहे है, माँ जी आती होगी।
पति-     बोलो तो यही बुला दूँ नर्स दीदी को।
रचना-    नहीं पास में ही तो जाना है कितनी दूर है, और वैसे भी वो आते-जाते खुद हमारे बच्चे को देख जाती हैं।
सास-    रचना ये रचना चल, अभी तो हमारा गोलू ठीक है।
रचना-    हाँ, माँ जी चलिये।  हम लोग इसे दिखाकर आते हैं। चलिये मां जी।
-    -    -    -    -    -    -    -    -    -    -    -    -    -    -    -    -
नर्स-     कब से हो रहे है दस्त इसे
रचना-    अभी चार-पाँच घण्टे से
नर्स-     और कितने दस्त हो चुके हैं?
रचना-    वैसे 4-5
नर्स-     वैसे घबराने की जरूरत नहीं है इसे सिर्फ माँ का दूध पिलाओं बाहर का दूध बिलकुल नहीं
रचना-    और दवाई वगैरह
नर्स-     अभी इसकी कोई जरूरत नहीं है अभी इसे सिर्फ माँ का दूध पिलाओ दिन में 7-8 बार और रात में 3-4 बार।
सास-     ऐसा, लेकिन इस से रचना का..
नर्स-      कुछ नहीं अरे काकी माँ जितना दूध पिलागी उसे उतना ही दूध बनेगा। गर्मी में केवल माँ का ही दूध देना है समझी काकी।
सास-     हाँ लेकिन इसे बीमारी वगैरह थोड़ी ना है।
नर्स-      नहीं इसे बी.सी.जी. का टीका भी लग चुका है वजन भी ठीक है वैसे वजन हर महीने कराना है आपको इसका। बाकी कोई परेशानी नजर नहीं आती है। हाँ बस इसे 6 माह तक माँ का ही दूध देना।
सास-    ठीक तो सुलेखा ड़रने की कोई बात तो नहीं
नर्स-     हाँ बिलकुल
सास-     तो चलो रचना चले........................................
- - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - -
सास -    आओ कमला आओ
कमला -   कैसा है अपना गोलू।
सास -    मस्त है। ऐसे हाथ पाँव चलाता है कि पूछो मत।
कमला -  ऐसा।
सास -    हाँ और जब अपनी गोल गोल आँखों के देखता हुआ मुस्कुराता है तो बस क्या बताऊँ    कमला मैं तो धन्य हो गई, उसे तो छोड़ने का मन ही नहीं करता।
रचना -    सुबह से रात तक माँ जी गोलू गोलू करते घूमती रहती है जब इसका दूध का समय होता है तभी बस मुझे मिलता है।
सास -    क्यों पूरी रात भी तो तेरे पास रहता है।
कमला -  चलो अच्छा हुआ गौरी काकी आपका समय आप बढ़िया गुजरेगा।
सास -    मेरे बेटे बहू ने मेरी मुराद पूरी कर दी है।
-    -    -    -    -    -    -    -    -    -    -    -    -    -    -    -    -
पति -    रचना.....रचना देख गोलू ने मेरे ऊपर फिर सू सू कर दी। मेरे ऊपर ही करता है ये हमेशा           सूसू।
रचना -    आई।
सास -    गोलू की लंगोटियाँ आँगन में सूख रही हैं।
रचना -    ठीक है माँ जी।
कमला -   गौरी काकी एक बात बताओ।
सास -     पूछो।
कमला -   जितना ख्याल आप गोलू का रखती हैं, उतना रचना का भी रखती हैंं या नहीं।
सास -    रखती हूँ, क्यों नहीं रखूँगी। आखिर उसने अपनी कोख से मुझे इतना बड़ा सुख दिया है।
कमला -   ये तो बहुत अच्छी बात है, लेकिन उसके खान पान पे ज्यादा ध्यान रखना। स्तनपान कराने वाली माँ के आहार में अभी भी एक अतिरिक्त भोजन देना जरूरी है। तेल दलिया देते ही     रहना और दलिया तो सिर्फ बहू को ही देना है बाकी कोई दूसरा ना खाए।
सास -    अच्छा - वैसे बाकी खाना तो ठीक ही खाती है।
कमला -  मैं तो कहती हूँ उसे तिरंगा भोजन दो।
सास -    तिरंगा भोजन....माने.....
कमला -  केसरिया, सफेद और हरे खाद्य पदार्थ...केसरिया गाजर, सेव, पपीता, संतरा, दालें आदि,
सफेद में चावल, मूली, मछली, अंडा, दूध, दही, घी वगैरह और हरे में सारी हरी सब्जियाँ।
सास -    ये तो तुमने बहुत बढ़िया बताया तिरंगा भोजन।
कमला -    हाँ -ये संपूर्ण पौष्टिक आहार है जो स्तनपान कराने वाली माताओं के लिये बहुत जरूरी है। इतनी दफे माँ अपना दूध बच्चों को पिलाती है तो उसे भी तो पौष्टिक आहार की जरूरत होगी।
सास -    समझ गई, मैं सब समझ गई। रामू ...ओ रामू....
रामू -    जी,  बताइये।
सास -    ये ले पैसे, थैला ले, बाजार जा और गाजर, सेव, संतरा, घी, भाजियाँ सब ले आ।
रामू -    पर इतनी सारी चीजें कैसे लाऊँ।
सास -    अपने सिर पर लाद के ला। कैसे भी ला पर तुरंत लो।.......और सुन.....

Thursday, November 25, 2010

रे‍डि‍यो धारावाहिक रचना-5

पंचम एपिसोड
प्रसव
सूत्रधार 1- पिछले अंको में केयर इंडिया छत्तीसगढ़ से प्रसारित इस प्रयोजित धारावाहिक रचना में आपने सुना, रचना अपनी किशोरावस्था में थी मात्र 15 वर्ष की आयु में उसकी माँ ने उसकी शादी कराने की कोशिश की लेकिन घर में दादी और रचना के पिता ने ऐसा होने नहीं दिया। साढ़े 18 साल की होने के बाद रचना की शादी दीनू से हुई जो काफी समझदार है। स्वास्थ्य केन्द्र जाकर उसने सारी जानकारियां ली थीं। रचना को भी आंगनबाड़ी दीदी ने समझायाकि बच्चों की जल्दी नहीं करना। शादी के दो-ढाई साल के बाद उन दोनों ने पैसों की कुछ  बचत भी कर ली, और शारीरिक और मानसिक रूप से तैयार हो गये। गौरी काकी को खबर  हुई कि वो दादी बनने वाली है, हाँ रचना के घर में भी आंगनबाड़ी दीदी, सुलेखा दीदी, नर्स दीदी, कुन्ती दाई, और निसा मितानिन ने इन नौ महिने में रचना को बहुत सहयोग दिया। गर्भावस्था के दौरान क्या खाना है, कैसे रहना है, सारी बातों में उसे और गौरी काकी को  विस्तृत रूप में समझाया, रचना के गर्भावस्था को नौ महीने पूरे हो चुके हैं और अब कभी  भी खबर आ सकती है कि रचना माँ बन गई है। चलिये हम भी चलें रचना के घर पर।

Get this widget | Track details | eSnips Social DNA

रचना -     सुनिये
दीनू -    हाँ कहो।
रचना -    अब आप काम पे बिलासपुर जाना बंद करिये।
दीनू -    क्यों क्या हुआ?
रचना -    वो पिछले बुधवार दाई कह रही थी कि बस एक-आध हफ्ते की बात हैं और आज....आज बुधवार है।
दीनू -    लेकिन अभी तुम्हें दर्द वर्द तो हो नहीं रहा है। और फिर आज मैं काम पे थोड़े ही जा रहा  हूँ वो पेमेन्ट लेना है। बस पैसे लिये और वापस।
रचना -    लेकिन जल्दी आना...मुझे डर लग रहा है।
दीनू -    डरना कैसा रचना - माँ हैं घर में - कमला दीदी तो आजकल रोज ही आ रही हैं। दाई  भी आज आने वाली है और अपना रामेश्वर तो गाड़ी तैयार करके बैठा है। तुम बिल्कुल चिंता मत करो।
रचना -    वो सब ठीक है लेकिन जब आप पास रहते है तो मुझे अच्छा लगता है, बिल्कुल चिंता नहीं             रहती। पर...
दीनू -    रचना बस मैं यूं गया और यूं आया। थोड़े पैसे और इकट्ठे हो जायेंगे तो काम ही आयेंगे।  सब ठीक होगा रचना तू बिल्कुल चिंता मत करना। ठीक।
रचना -    जी..पर आप जल्दी आना, निसा मितानिन को बोलते हुये जाइयेगा।
दीनू -    हाँ।
--        --        --        --
(सिलाई मशीन की आवाज)
रामू -    ऐ रामू।
रामू    -    क्या?
सास -    वो कपड़ा उठा दे।
रामू  -    लेकिन आप ये सब क्या सिल रही हैं।
सास -    तेरे भतीजे के लिये कपड़े।
रामू -    लेकिन वो तो अभी पैदा भी नहीं हुआ।
सास -    तो क्या हुआ...तैयारी तो करनी पड़ती है ना।
रामू -    अच्छा...? पर उसे पुराने कपड़े क्यों पहनायेंगे? नये नये कपड़े बाजार से भी तो खरीद सकते  हैं।
सास -    नहीं रामू -एक तो उतने छोटे नये कपड़े बाजार में मिलते नहीं। फिर वो थोड़े कड़े होते  
दीनू    -    कहाँ है माँ रचना।
सास -    जा जल्दी से मिल ले फिर बाहर आ जा।
कमला -    ज्यादा देर नहीं लगाना दीनू और वहाँ कुछ छूना मत।
कुंती -    चलो मेरे हाथों में पानी डालो, हाथ धोने है।..लाओ साबुन दो...हाँ बस बस (पानी की आवाज)
हाँ अब ठीक है।
सास -    ये लो तौलिया
कुंती -    मैंने आपसे तौलिया मांगा क्या?
सास -    नहीं..पर...
कुंती -     मैं चलूं समय हो गया है।
कमला -    गौरी काकी....प्रसव कराते समय हाथ धोने के बाद तौलिये से हाथ नहीं पोंछते, हवा में ही  सुखाते हैं
सास -    क्यों
कमला -    संक्रमण का डर रहता है।
सास -    हे भगवान सब ठीक-ठाक हो जाये, सवा किलो लड्डू चढ़ाऊँगी।
निशा -    अब आप यहाँ आराम से बैठ जाओ, सब ठीक हो जायेगा।
रामू -    दीनू भैया तो बहुत घबराये हुये थे। बार बार पूछ रहे थे रचना कैसी है? रचना कैसी है? और इतनी तेज साइकिल चलाये कि मोटरसाइकिल भी उतनी तेज नहीं चल सकती।
सास -    बहुत चाहता है रचना को मेरा दीनू, लो वो आ गया, रचना कैसी है बेटा।
दीनू -    बहुत दर्द है उसे माँ बहुत तकलीफ है।
निशा -    अरे बेटा ये तकलीफ तो हर माँ को होती है। बस थोड़ी देर और फिर ये दर्द..खुशी में बदल  जायेगा ...बस कुछ देर और....
रामू -    याने मैं चाचा बनने वाला हूँ ऽ ऽ
रचना की आवाज - आ..आ..आ
निशा -    बधाई हो, बधाई हो
सास -    हो गया.....क्या हुआ।
निशा -    पहले मिठाई तो खिलाओ।
सास -    ए परेशान मत कर जल्दी बता क्या हुआ।
निशा -     पहले मिठाई
सास -    तो बता कौन सी मिठाई खिलाऊँ।
निशा -    लड्डू।
सास -    माने..माने पोता हुआ है।
निशा -    हाँ गौरी काकी पोता हुआ है। आप दादी बन गईं। (थाली बजाने की आवाज) 
और दीनू तुम बाप बन गये हो।
रामू     -    और मैं चाचा.... चलो अंदर चलो।
निशा -    अभी रुको...थोड़ा काम बचा है, पूरा होने दो फिर देखना बच्चे को।
सास -    हाँ अभी बच्चे को नहला धुला कर साफ...
कमला -    अरे नहीं गौरी काकी, बच्चे को तो तीन दिनों तक नहीं नहलाना है।
सास -    क्यों ऐसे ही गंदा रहेगा क्या?
कमला -    अरे नहीं...उसे पोंछ कर साफ कर देंगे, तीन दिनों बाद नहलायेंगे...अभी नहला दोगे तो डाभा हो जायेगा।
दीनू -    डाभा क्या?
निशा -    निमोनिया...तीन दिन के पहले बच्चे को नहलाने से बच्चे को डाभा मतलब निमोनिया होने             का खतरा होता है।
कुंती -    आ जाओ अब सब भीतर आ जाओ।
        (हाय कितना अच्छा है, बिल्कुल बाप पर गया है, अरे नहीं रे रचना पर गया है)
        बस दूर से ही देखो।
सास -    आहा बहुत सुंदर है मेरा पोता...लाओ शहद लाओ...मैं इसे शहद चटा दूं।
कुंती -    आपको इसे पानी भी नहीं देना है, शहद की बात करती हैं।
सास -    हर बात में मत टोका कीजिये आप।
कमला -    नहीं मांजी कुंती दाई ठीक कह रही है। अभी इसे कुछ नहीं देना है।
सास -    तो इसे देंगे क्या, इसका गला नहीं सूख रहा होगा।
निशा -    इसे अभी सिर्फ माँ का दूध देना है और कुछ नहीं।
कुंती -    माँ का पहला दूध बच्चे के लिये अमृत के समान होता है। चलो रचना थोड़ा इधर घूम जाओ             और आप लोग थोड़ी देर के लिये बाहर जाइये। रचना मातृत्व का पहला पाठ सीखेगी।
सास -    ये कुंती का बोलना मुझे ठीक नहीं लगता।
कमला -    अरे उसके बोलने का ढंग भर ऐसा है, बाकी वो बहुत अच्छी और अनुभवी है। ये सब वो             इसलिये कर रही है जिससे आपका पोता और बहू स्वस्थ रहें।
सास -    मुझे तो खैर .....अब छोड़ो... ऐ..दीनू मैंने रचना के लिये कासा पानी और बिस्कुट रखे हैं..थोड़ी देर बाद दे देना।
कमला -    कासा पानी और बिस्कुट...ये क्यों।
सास -    अरे प्रसव के बाद ऐसे ही हल्का फुल्का देना चाहिये।
कमला -    नहीं गौरी काकी.....उसे तो बल्कि आप पूरा खाना दीजिये, वो भी पौष्टिक खाना।
सास - - क्यो वो भारी नहीं होगा।
कमला -    नहीं गौरी काकी, वो तो बहुत जरूरी है।
सास -    क्यों?
कमला -    उसे अब अपने बच्चे को दूध भी पिलाना है और प्रसव के बाद शरीर कमजोर भी तो होजाता है। उसे 2-3 रोटी, दलिया, दाल वगैरह पौष्टिक चीजें दो और मैं तो कहती हूँ आप ज्यादा ध्यान इसी बात पर दीजियेगा। देखती रहियेगा कि रचना ये सब खा रही हे कि नहीं। अगर न खाये तो...
सास -    एक डाँट लगाऊँगी तो उसका पति भी खायेगा। वो मैं सब देख लूंगी। तू तो बस मेरी गोदी में मेरा पोता दिलवा दे-थोड़ी देर के लिये ही सही।
कुंती -    लीजिये अपना पोता, बस थोड़ी देर के लिये ही दे रही हूँ...और आपको बहुत बहुत बधाई  दादी बनने की।
सास -    आप मुझे बधाई दे रही हैं...
कुंती -    क्यों मैं क्या आपको बधाई नहीं दे सकती।
सास -    नहीं नहीं वो बात नहीं है। मुझे दरअसल आप थोड़ी....
कुंती -    कठोर, क्रूर, बददिमाग लगी थी...हैना...
सास -    हाँ बिल्कुल...वैसे सही बताऊँ मैं तो तुम्हें बिल्कुल भी पसंद नहीं कर रही थी।
कुंती -    अब
सास -    आओ गले मिलो ....और....बहुत बहुत धन्यवाद

Tuesday, November 9, 2010

रेडियो धारावाहिक रचना - 4

रचना - चतुर्थ एपिसोड

गर्भावस्था (द्वितीय चरण)

हमारे इस धारावाहिक के पिछले एपिसोड में आपने सुना कि रचना मां बनने वाली है और शुरू के 6 महीनों में क्‍या सावधानी रखनी चाहिये ये भी हमने आपको जानकारी दी थी। अब रचना को सातवां महीना लग गया है आगे क्‍या हो रहा है आइये सुनते हैं।




रचना - आह...आह...
पति - क्या हुआ...रचना क्या हुआ.... कोई तकलीफ तो नहीं। शायद बच्चा हिल रहा था।
पति़ - हिल रहा था कि हिल रही थी।
रचना - क्या पता मुझे क्या मालूम।
पति - रचना तुम देखना लड़की होगी ।
रचना - पर माँ जी तो लड़का चाहती हैं ।
पति - लेकिन होगी लड़की ही तुम देखना और उसका नाम हम ज्योति रखेंगे।
रचना - और अगर लड़का हुआ तो?
पति - दीपक दीपक रखंेगे उसका नाम। वैसे रचना लड़का हो या लड़की हम उसे
खूब पढायेंगे लिखायेंगे ताकि वो अपना भविष्य संवार सके।
रचना - सच में मैं कितनी भाग्यशाली हूँ जो आपके समान सुलझा हुआ पति मिला ।
पति - ये सब बातें छोडो रचना तुम ये बताओ रामेश्वर आया था क्या ।
रचना - रामू भैया तो नहीं आए पर खबर भिजवाई थी कि शहर से आ गए हैं। क्या काम उनसे।
पति - अरे उसे ट्रेक्टर ट्राली की व्यवस्था के लिये कहा था ।
रचना - लेकिन डिलीवरी तो घर में दाई करेगी, तो गाड़ी का क्या काम।
पति - अरे मान लो कोई दिक्कत आ जाये। भगवान न करे कोई परेशानी खड़ी हो जाये तो
तुरंत स्वास्थ्य केन्द्र या अस्पताल जाने के लिये वाहन तो लगेगा ना कि बैलगाड़ी से जाओगी।
रचना - लेकिन अभी तक तो कोई परेशानी नहीं है।
पति - परेशानी या मुसीबत तुम्हें बोलकर या दरवाजा खटखटाकर तो आयेगी नहीं। रामेश्वर को
मैंने कहा था कि अपनी गाड़ी तैयार रखना। क्या पता कब जरूरत पड़ जाये। मैं अभी आता हूँ।
रचना - जल्दी आना।
पति - बस यूं गया और यूं आया।


सुलेखा - गौरी काकी ये कमरा नहीं चलेगा।
सास - क्यों इसमें क्या बुराई है। थोड़ा छोटा जरूर है पर साफ-सुथरा तो है।
सुलेखा - वो तो ठीक है काकी, पर इसमें रोशनी कम है और कमरा अच्छा हवादार होना चाहिये।
सास - ऐसा-तो...तो फिर मेरा कमरा तैयार कर लेते हैं, उसमें दो खिड़कियाँ भी हैं।
सुलेखा - आपके कमरे में दो खिड़कियाँ हैं।
सास - हाँ - वो एक खिड़की आंगन में खुलती है - देखना पड़ता है ना, बहू कितना काम
कर रही है वैसे वो काम ठीक ठाक करती है।
सुलेखा - और दूसरी खिड़की।
सास - वो बाड़ी में ताजा हवा भी मिलती है और शैतान बच्चे नींबू, करौंदा, बेल वगैरह
तोड़ नहीं पाते।
सुलेखा - तभी आप इतनी तंदरुस्त हैं ताजा हवा जो आपको मिलती रहती है। लेकिन रचना के
प्रसव के लिये आपको उसे खाली करना होगा। उस समय बढ़िया धुलवाकर अच्छी तरह साफ भी
करवा दीजियेगा।
सास - लगता है कोई आया है।
सुलेखा - कमला दीदी दाई के साथ आई होंगी तैयारी देखने, उन्होंने ही मुझे भी यहाँ भेजा था।
सास - बड़ा ख्याल रखती है कमला। गाँव भर की मदद के लिये हमेशा तैयार रहती है।
कैसे कर लेती है इतना सब।
सुलेखा - आओ कमला दीदी थोड़ी देर कर दी आने में।
दाई - नमस्ते।
कमला - अरे हम तो समय पर आ गये थे। वो रास्ते में दीनू मिल गया था। रामेश्वर घर
में नहीं मिला तो गाँव भर में साइकिल दौड़ाते उसे ढँूढ रहा था। बेवजह घबरा जाता है दीनू।
सुलेखा - घबरायेगा क्यों नहीं आखिर पहली बार बाप बन रहा है।
सास - अभी कौन कल परसों में बाप बन रहा है। अभी तो समय है। लेकिन वो रामेश्वर को
क्यों ढूँढता फिर रहा है।
कमला - गाड़ी की व्यवस्था तो रामेश्वर ही कर रहा है ना गौरी काकी।
सास - बहुत दिनों से गाड़ी-गाड़ी सुन रही हूँ, आखिर उसकी जरूरत क्या है।
सुलेखा - भगवान न करे पर अगर उसे तेज बुखार आ जाये, चक्कर आ जाये, दौरा पड़ जाये,
सिर में तेज दर्द होने लगे, प्रसव पीड़ा 10-12 घंटे से ज्यादा चले या फिर प्रसव के बाद ज्यादा
क्त बहे तो एक स्थितियों में जच्चा को तुरंत इलाज की जरूरत होती है। तुरंत अस्पताल ले जाना
पड़ता है। इसलिये सावधानी के लिये गाड़ी का इंतजाम पहले से कर लेना अच्छा रहता है।
सास - तुम लोग ज्यादा ही पंचायत करते हो। हमारे समय में ऐसा कुछ नहीं था। घर की
बुजुर्ग ही सब संभाल लेती थीं।
कमला - इसीलिये उस समय शिशु मृत्यु दर ज्यादा थी। अप्रशिक्षत हाथ बच्चे की जान को
खतरे में डाल देते थे। आज प्रशिक्षित दाइयाँ हैं, सुविधाएँ हैं, जानकारियाँ हैं तो शिशु पहले के
मुकाबले ज्यादा सुरक्षित है।
सास - वैसे तुम ठीक कह रही हो। हम छः भाई बहन थे। मैं सबसे छोटी थी। पिताजी बताते
थे तीन तो जनम के समय ही साथ छोड़ गये और मेरे जन्म के 1 माह बाद माँ चल बसीं।
बड़ी मुश्किल से पाला गया था। मुझे....
सुलेखा - इसी को..इसी को....मातृ मत्यु कहते हैं। प्रसव के दिन से 45 दिनों दिनों के
भीतर माँ की मौत हो जाये तो उसे मातृ मृत्यु कहते हैं और ये सिर्फ गंदगी, या ये कह लो
लापरवाही के कारण होता है।
सास - हे भगवान यहाँ ऐसा कुछ ना हो तुम लोग जो बोलोगे वैसा ही होगा।
कमला - अरे काकी ऐसे से घबराने की जरूरत नहीं। ये अपनी दाई है ना - प्रशिक्षित भी है
और अनुभवी भी। ये सब संभाल लेगी, क्यों कुन्ती।
कुन्ती - बिल्कुल और मैं तो बिल्कुल तैयार हूँ - बस मुझे जगह याने कमरा दिखाओ,
प्रसव का सारा समान दिखाओ और बाद में फिर रचना बहू से मिलवा देना।
सुलेखा - गौरी काकी आप दाई जी को कमरा सामान माने तैयारी दिखाओ मैं और कमला
रचना के पास जा रहे है-और मिल भी लेगें
सास - ठीक है आप आइये - - तो ले ये है कमरा जहॉं आप प्रसव करायेगी
दाई - वाह कमरा तो बढ़िया है -रोशनी अच्छी है -हवादार है -
सास - मेरा कमरा है ये
दाई - बस यहॉं से ये पेटी;ये बक्सा ये सब हटवा दीजिएगा और साफ करवा दीजिएगा;
बाकी कमरा बढ़िया है ठीक है
सास - मेरा कमरा है ये - दो दो खिड़कियाँ है ।
दाई - और बाकी क्या व्यवस्था कर रखी है आपने ।
सास - हाँ-वो -वो - ये नया बढ़िया साबुन है - बहुत मंहगा है 14 रूपये का- और
नया धागा- ये सफेद ही लिया दीनू ने मैने तो - कोई रंगीन धागा....
दाई - दीनू ने अच्छा किया-और ब्लेड
सास - ये रहा- मैने तो पूरा पैकेट ही मंगवा लिया थोडा खर्चा हो जाय पर तैयारी में
कमी नहीं होनी चाहिए - थोडे़ पैसे जरूर ज्यादा -
दाई - कपड़ा दिखाईये
सास - वो तो मैनें अपनी साड़ी फाड़ दी थी - और ये देखो दीनू की टेरीकाट की शर्ट
खराब नहीं और ज्यादा पुरानी भी नहीं है - पर ऐसे में ये सब नहीं देखा जाता - मैंने तो कहा --
दाई - कपडे़ नहीं चलेंगे - इन्हें बदलिये -
सास - क्यों ये टेरीकाट का कपडा है और ये सिन्थेटिक साडी - इसमें क्या बुराई है -
अच्छे खासे तो हैं।
दाई - नहीं सूती कपड़े ही चलेंगे - सूती कपड़े - सिर्फ सूती कपड़े समझीं
सास - हाँ- समझ गई...पर
दाई - और कपड़े बिल्कुल साफ धुले हुए होने चाहिये।
सास - अच्छा - ठीक है
दाई - और अब मुझे रचना से मिलना है।
सास - हाँ-हाँ तो चलिये।
दाई - कैसी हो रचना बिटिया - सब ठीक है।
रचना - हाँ दाई जी...सब ठीक है, अभी तक तो कोई परेशानी नहीं है।
दाई - बढ़िया
सुलेखा - इसका ब्लडप्रेशर भी बिल्कुल नार्मल है -पिछले माह कुछ बढ़ा हुआ था पर अभी
तो लगातार नार्मल आ रहा है।
दाई - अच्छी बात है...रचना बीच में कभी तुम्हें बुखार वगैरह - सर दर्द या चक्कर
जैसा तो नहीं आया।
रचना - नहीं दाई जी
दाई - और वो - मैंने तुम्हे पहले भी कहा था वो वहाँ से बदबूदार पानी वगैरह की
शिकायत तो नहीं हुई।
रचना - नहीं।
दाई - बहुत बढ़िया - वैसे भी तुम काफी स्वस्थ दिख रही हो - खाने वाने मे कोई
कोताही नहीं की तुमने ठीक से पौष्टिक खाना खाया है।
रचना - जी वो
सास - क्या जी - वो तो मुझे जब कमला ने बोला था कि एक अतिरिक्त पौष्टिक खुराक
भी देनी है वो दिन है और आज का दिन है रोज इसे डाँट-डपट के खिलाती हूँ।
दाई - आपने बहुत अच्छा किया - यही एक काम अच्छा किया । अच्छा रचना तुम्हारे
प्रसव के लिए मै तो खैर तैयार थी पर तुमसे मिलकर ऐसा लगा कि तुम भी पूरी तरह
तैयार हो बहुत अच्छा लगा -
सुलेखा - दाई जी आप संतुष्ट है माने सब ठीक है ।
कमला - मतलब 2-3 माह मे गौरी काकी को दादी दादी बोलने वाला या वाली....
दाई - तीन नहीं - मेरा अनुभव कहता है कि तीन माह से पहले ही ये काकी दादी बन जायेंगी।

लेखक
- डॉ रोजश टंडन

प्रतिभागी - नम्रता बाजपेयी, संध्‍या, श्‍वेता पांडे, ऐश्‍वर्य लक्ष्‍मी बाजपेयी, पदमामणि
प्रस्‍तुति - संज्ञा टंडन

Thursday, October 14, 2010

रे‍डि‍यो धारावाहिक रचना-3

तृतीय एपिसोेड
गर्भावस्था (प्रथम चरण)

सूत्रधार 1- रचना की शादी हुई थी पिछले एपिसोड में, उसके बाद ढाई साल बीत गये है तब रचना और उनके पति जो बहुत समझदारी से पूरी प्लानिंग के साथ उन्होंने नया जीवन जीना सीखा था उन्होंने दो, ढाई साल में अपने परिवारिक जिम्मेदारियां भी निभाई, अपनी माँ को लेकर हरिद्वार गये। आर्थिक रूप से सुदृढ़ हुये, मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार हुये, उसके बाद उन्होंने माँ-बाप बनने का फैसला लिया।
सूत्रधार 2- और रचना के सास के लिए वह दिन आ गया जिसका उनको इंतजार था।




सास - बहुत तरसाया बहू। साल भर परेशान किया तूने । देर से सही लेकिन जिंदगी की सबसे बड़ी खुशखबरी सुनने की घड़ी आ ही गई।
रचना - लेकिन माँ पहले पक्का तो हो जाए, जाँच तो हो जाए।
सास - वो तो अपन अभी चल रहे हैं। आज तो नर्स दीदी के आने का भी दिन है। चल जल्दी से तैयार हो जा। तैयार क्या होना, अच्छी खासी तो दिख रही है। मुँह में पानी मार और चल।
रचना - चल रही हूँ माँ, चल रही हूँ।
सास - पक्का होने के बाद ये खबर दीनू को तू ही देना।
रचना - मैं नहीं बताऊँगी। उनको आप ही बताइयेगा। मुझे लाज आयेगी। पर माँ पहले पक्का तो हो जाने दीजिये। अभी
15 दिन ही तो ऊपर हुये हैं।
सास - ठीक है चल, अभी तो आंगनबाड़ी चलें
-- -- -- -- --
कमला - (आंगनबाड़ी दीदी) -अरे गौरी काकी नमस्ते। बहुत दिन बाद आना हुआ। तेरी हरिद्वार यात्रा के बाद एक बार
मिली फिर गायब ही हो गई। दो दफे आपके घर भी गई तो आपसे मुलाकात नहीं हुई। बहुरिया मिली थी।
सास - अरी कमला, ये शिकवा शिकायत छोड़, पहले ये बता कि सुलेखा नर्स आई है कि नहीं।
कमला - क्यों क्या हुआ? क्यों रचना.......ऐसा क्या....खुशखबरी.....सुलेखा...सुलेखा। खबर देने में साल भर का इंतजार करवाया, लेकिन मैं तो कहती हूँ, बहुत अच्छा किया। बढ़िया घूमे फिरे, मस्ती.....अरे सुलेखा जरा रचना की जाँच कर ले।
सुलेखा - अरे वाह रचना। आओ चलो अंदर चलो रचना। आखिरी बार महीना कब आया था।
रचना - पिछले महीने 2 तारीख को।
सुलेखा - और आज हो गई 27...माने..... उम्मीद तो बनती है। आओ बैठो। अरे कमला दीदी परदा नीचे कर दो और यहाँ किसी को आने मत देना।
कमला - ठीक है तू अपना काम कर। यहाँ मैं संभाल लूँगी। क्या बताएँ गौरी काकी, यहाँ सब कुछ इतना अच्छा है इतनी ट्रेन्ड नर्स है, पर ए.एन.सी. टेबल नहीं है।
सास - ए.एन.सी. टेबल क्या?
कमला - अरे जाँच की टेबल, जिस पर लिटा कर जाँच की जाती है। अभी आराम कुर्सी से ही काम चलाना पड़ता है।
सास - तो लेते क्यों नहीं?
कमला - फंड की दिक्कत है। अरे आप को तो सरपंच तुलेश्वर जी बहुत मानते हैं। आप ही उनको बोलकर ए.एन.सी.
टेबल की व्यवस्था पंचायत से करवा सकती हैं।
सास - बिल्कुल वो तो बहुत जरूरी है। अगली दफे मेरी बहू यहाँ जाँच के लिये आयेगी तो वही ...क्या...ए....
कमला - ए.एन.सी. टेबल
सास - हाँ वही ए.एन.सी. टेबल पर ही जाँच करवायेगी। मैं बोलती हूँ तुलेश्वर से।
सुलेखा - गौरी काकी-गौरी काकी...अपने कुलदेवता को प्रसाद चढ़ा दो। रचना माँ बनने वाली है।
सास - सच...हे भगवान...मेरी बरसों की इच्छा पूरी हो गई......याने याने मुझे दादी-दादी बोलने वाला कोई आने वाला है।
सुलेखा - हाँ बिल्कुल आने वाला है ...और अब रचना का ख्याल रखना। इसे अब बराबर अपनी जाँच करवाते रहना पड़ेगा।
कमला - गौरी काकी आपको बहुत बहुत बधाई और रचना तुम्हें भी। आओ तुम्हारा पंजीयन कर दें।
सास - पंजीयन.....? वो क्यों?
कमला - पहली तिमाही में प्रत्येक गर्भवती का आंगनबाड़ी में पंजीयन करवाने से माँ के स्वास्थ्य की लगातार जाँच भी होती है और जरूरी दवाएँ और सलाह मिलती रहती है। खैर चलो रचना अब तुम घर जाओ और जाकर थोड़ा आराम
करो। तुम्हें क्या करना है क्या नहीं, वो मैं शाम को आकर बताऊँगी। आज गृह भ्रमण में तुम्हारे घर भी आना है।
सास - पक्का आना...मिठाई भी खिलाऊँगी। हे भगवान मैं दादी बनने वाली हूँ। चल चल रचना घर चलें।
कमला - गौरी काकी. वो सरपंच जी आ रहे हैं, उनको वो जाँच वाली टेबल के लिये बोल देतीं।
(मोटर साइकिल की आवाज)
सास - ए तुलेश्वर...तुलेश्वर...ओ सरपंच जी सुनो।
सरपंच - क्या हुआ गौरी काकी मुझे सरपंच जी बोल कर शर्मिंदा मत करो..मैं तुम्हारा तुलेश्वर ही हूँ...पाँव लागूं।
सास - खुश रहो।
सरपंच - आप बड़ी खुश दिख रही हैं गौरी काकी, क्या बात है और रचना बहू भी साथ है।
सास - खुशी की तो बात है ही ...मैं दादी बनने वाली हूँ और दीनू बाप।
सरपंच - और मैं ताऊ...ये तो बहुत खुशी की बात है। मैं मिठाई मंगवाता हूँ।
सास - मिठाई तो मैं तुम सबको खिलाऊँगी। तू तो बस वो टे..ए. ...वो क्या टेबल थी कमला ...
कमला - ए.एन.सी. टेबल, गौरी काकी ।
सास - हाँ वही ए.एन.सी. टेबल...तू उसका इंतजाम अपनी पंचायत से करवा दे।
सरपंच - अभी-अभी तो वजन मशीन आंगनबाड़ी को दी हे हमने।
सास - वो तो तूने बड़ा अच्छा किया। अब एक धरम का काम समझ के ये जाँच टेबल की भी व्यवस्था पंचायत से करवा दे बेटा। लड़की जात को जाँच में सुविधा हो जायेगी।
सुलेखा - हाँ सरपंच जी । इसके बिना बड़ी परेशानी है। अब कैसे बतायें, महिलाओं को यहाँ वहाँ बिठाकर लिटाकर जाँच
करनी पड़ती है। इंन्फेक्शन का डर अलग रहता है। बहुत परेशानी.
सरपंच - ऐसी बात है तो वहले बताना था ना...मैं तुरंत इसका इंतजाम करवाता हूँ।
सास - मैं जानती थी तू मेरी बात नहीं टालेगा।
सरपंच - इसमें बात टालने वाली क्या बात है काकी, जनसेवा का काम है। नर्स दीदी तुम मुझे बताना कैसी टेबल बननी है..या खरीदनी है...मैं उसका इंतजाम करवाता हूँ। और गौरी काकी आप मिठाई का इंतजाम करो मैं शाम को घर आ रहा हूँ। (मोटर साइकिल स्टार्ट होने की आवाज) और दीनू को मेरी तरफ से बधाई देना।
-- -- -- --
रचना - आप को एक बात बताऊँ।
पति - बताओ
रचना - वो ना.....वो ना.... मैं
पति - क्यों वो वो लगा रखा है...सीधे सीधे बताओ ना..
रचना - वो...वो...बचपन में मैं अपने दोस्तों के साथ गंगू चाचा की बाड़ी में मैं अपने दोस्तों के साथ घुस जाती थी और हम लोग खूब सारे आम तोड़ते थे। गंगू चाचा शायद सब देखते थे, पर अनजान बनते थे। फिर जब हम लोग
आम तोड़ लेते थे। तो वो हमारे पीछे दौड़ते थे और किसी एक को पकड़ लेते थे। जो पकड़ा जाता था उसे कान
पकड़ कर उठक बैठक करनी पड़ती थी। उन्होंने मुझे कभी नहीं पकड़ा जबकि मैं वहीं बाड़ी के किनारे बैठकर
आम खाती रहती थी।
पति - लेकिन ये सब तुम्हें अभी क्यों याद आ रहा है?
रचना - मुझे आज कच्चा आम खाने की इच्छा हो रही है। आम ला दो ना...सिर्फ 2-4 कच्चे आम।
पति - अब इस वक्त मैं कच्चे आम कहाँ से लाऊँ।
रचना - तो फिर थोड़ी सी इमली ले आओ...वो भी चलेगी।
पति - इमली! अच्छी जिद लगा रखी है, कभी आम कभी इमली।
रचना - तो फिर कोई खट्टा सा अचार ही ला दो, उसी से काम चला लूंगी।
पति - रचना तुम...ये क्या हो गया है तुम्हें...आम, इमली, अचार...खट्टा...खट्टा .......अरे रचना...क्या क्या...मैं सही सोच रहा हूँ...तुम...तुम ......मैं बाप....
रचना - हाँ आज ही जाँच करवाई है।
पति - ओ रचना...तुम बहुत अच्छी हो...मैं मैं बाप बनने वाला हूँ...ओ रचना मैं सचमुच बाप बनने वाला हूँ।
रचना - अरे अरे उतारिये मुझे...गिर जाऊँगी, उतारिये ना।
पति - हाँ-हाँ तुम यहाँ आराम से बैठो..तुम्हें अब अपना खूब ध्यान रखना है।
रचना - हाँ वो तो है। शाम को कमला दीदी घर आयेंगी। बोल रही थीं..बहुत सी बातें समझानी हैं।
पति - वो आंगनबाड़ी कार्यकर्ता...कमला....वो बहुत अच्छे से अपनी बातें समझाती हैं। बहुत अनुभवी हैं, समझदार हैं।
रचना - समझदार तो आप भी है।
पति - वो तो मैं हूँ ही - स्वास्थ्य केन्द्र की सलाहें और तरीके अपना कर देखो, जब हमने चाहा तभी खबर मिली।
रचना - हाँ और इतने वक्त में आज कुछ रूपये भी हमारे पास हैं।
पति - अब तो मैं और मेहनत करूँगा, और पैसे बचाऊँगा, ताकि वक्त आने पर गाँठ में रकम पूरी हो। अगले 6-7 माह में काफी बचत करनी होगी...और उस समय के लिये गाड़ी की व्यवस्था भी करनी होगी।
रचना - उसके लिये तो अभी काफी समय है।
पति - तो क्या हुआ। गाड़ी की व्यवस्था के लिये अभी से रामेश्वर को बोल देता हूँ। उसके पास ट्रेक्टर ट्रॉली दोनों हैं।
रचना - कौन रामेश्वर?
पति - अरे वही सरपंच तुलेश्वर जी का छोटा भाई। मेरा अच्छा दोस्त है। वो मना भी नहीं करेगा।
रचना - आपको मेरा कितना ख्याल है, कितनी फिक्र है। अभी से सारी तैयारियों में जुट रहे हैं।
पति - हर वक्त ख्यालों में, ख्वाबों में तुम ही तुम तो रहती है। तुम्हारी फिक्र न करूँ तो किसकी करूँ, तो किसकी फिक्र करूँ।
रचना - सच!
पति - हाँ...तुम मेरी इकलौती बीवी जो हो।
रचना - ए.....
पति - हा..हा..हा..
-- -- -- -- --
सास - काफी देर कर दी कमला तुमने आने में....
कमला - हाँ गौरी काकी, 5-6 घर होकर आखिर में आपके यहाँ आई हूँ...आराम से बातें करेंगे...रचना को बहुत कुछ समझाना है। नहीं मालूम क्यों उससे बात करने में बहुत अच्छा लगता है। बहुत अच्छी बहू लाई हैं आप।
सास - मेरी निगाहें कभी धोखा नहीं खातीं - उसमें बचपना है, लेकिन है बहुत अच्छी जो बोलो बिना शिकायत करे
करती है। कोई भी काम बोलो मना नहीं करती, सवेरे जो उठती है रात तक जुटी रहती है।
कमला - लेकिन काकी अब उसे थोड़ा आराम दो और दिन में कम से कम दो घंटे तो वो कुछ ना करे, सिर्फ आराम करे।
सास - हाँ वो पानी भरने से तो मैं खुद उसे मना करने वाली थी। बाल्टी या भारी सामान उठाना ठीक नहीं।
कमला - वो तो खैर बिल्कुल भी नहीं करना है। साथ ही दिनमें दो घंटे आराम करना बहुत जरूरी है काकी। रचना को
डाँट के बोलना कि दोपहर में दो घंटा आराम करे।
सास - ऐसा...ठीक है मैं उसे दो घंटे बिस्तर से उठने ही नहीं दूंगी।
कमला - और गौरी काकी, उसे एक अतिरिक्त भोजन भी करवाना - वो मना करेगी पर जिद करके उसे एक बार एक्सट्रा खाना खाने को कहना।
सास - क्यों वो क्यों।
कमला - बच्चा क्या खायेगा जो पेट में और आपको दादी दादी कह कर बुलाने वाला है, उसे भी तो कुछ चाहिये, वो भूखा रहेगा क्या।
सास - ऐसा...रचना को को तो मैं एक डाँट लगाऊँगी तो वो दो बार एक्स्ट्रा खायेगी।
कमला - नहीं बस एक बार काफी है। खाना बस पौष्टिक हो, दलिया, दाल ही बहुत है। और अब तो उसका पंजीयन हो चुका है आंगनबाड़ी में, हर मंगलवार उसके लिये दलिया वहाँ से मंगवा लेना।
सास - ठीक है...रचना ए रचना...इधर आ....
रचना - हाँ माँ जी...नमस्ते कमला दीदी।
कमला - नमस्ते नमस्ते।
सास - सुन रचना - तुझे दिन में एक बार अलग से भोजन करना है, वो जो मैं दूंगी। तुझे दिन में दो घंटे आराम करना है..चाहे जो हो जाये और कोई भारी सामान नहीं उठाना है। आज से तेरा पानी भरना बंद भले ही तू अपने पति
दीनू को बोल कि शाम को जल्दी घर आये पानी भरने...ठीक कमला।
कमला - हाँ बिल्कुल ठीक, लेकिन और भी बातें हैं रचना जिनका तुम्हें ख्याल रखना है।
रचना - क्या...आप बतायँ..मैं जरूर ख्याल रखूँगी।
कमला - तुम्हें कम से कम तीन बार ए.एन.एम. से अपने पेट की जाँच करवानी है। ब्लड प्रेशर, फीटस्कोप से पेट जाँच और वजन लेना उसमें बढ़ोत्तरी-कमी की जाँच बहुत जरूरी है।
सास - ऐसा!
कमला - इसके अलावा एक माह के अंतराल पर टिटनेस के दो टीके सुलेखा नर्स से तुम्हें लेने होंगे और आयरन की
गोलयाँ मैं तुम्हें दे दूंगी-लाल गोली। तीन महीने तक रोज एक गोली खाने के बाद खानी है और खूब सारा पानी
पीना है। हो सकता है ये गोली खाकर तुम्हे कभी कभी उल्टी जैसा लगे, शौच का रंग काला सा हो तो तुम्हें
घबराना नहीं है और गोली खाना बंद नहीं करना है। ये होता है ...ठीक है।
रचना - हाँ दीदी, खाना खाने के बाद रोज गोली लूंगी।
कमला - और खाना भी पौष्टिक लेना। नींबू, आंवला, टमाटर, संतरा जैसे विटामिन सी बहुत जरूरी हैं तुम्हारे लिये।
रचना - ये सब भी खाना है।
सास - ये सब मैं देख लूंगी।
कमला - गौरी काकी दायी की व्यवस्था रखना और वो भी प्रशिक्षित दाई।
सास - प्रशिक्षित दाई...वो क्यो भला?
कमला - देखो काकी या तो अस्पताल में प्रसव कराना और घर में कराना हो तो प्रशिक्षित दाई से ही कराना।
सास - कमला, दाई तो दाई होती है, कोई भी हो बच्चा तो पैदा हो ही जायेगा।
कमला - बात तो ठीक है, लेकिन ऐसे में जच्चा बच्चा कभी कभी खतरे में पड़ जाते हैं।
सास - क्यों?
कमला - अच्छा ये बताओ क्या किसी भी स्कूल में अंगूठा आदमी छाप गुरूजी बन सकता है?
सास - हैं...कैसे बन सकता है, खुद अंगूठा छाप दूसरों को क्या पढ़ायेगा।
कमला - ठीक वैसे ही अप्रशिक्षित दाई, किसी का सफल प्रसव कैसे करा पायेगी। जो दाई प्रशिक्षण ले चुकी होती है, वो अपना काम अच्छे से जानती है, इसलिये दाई तो प्रशिक्षित ही ढूँढना।
सास - ऐसा
कमला - अब मैं चलूँ और रचना मैंने जैसा समझाया है वैसा ही करना।
सास - उसकी चिंता तू मत कर कमला। मैं हूँ ना, मैं सब देख लूंगी। तुम बस बीच में आती रहा करो। मुझे तो सिर्फ तोतली बोली में दादी दादी सुनना है...और ये क्या इसका पति भी वही करेगा जो मैं कहूँगी। चल बहू...तू सबसे
पहले...फल खा...फिर दलिया ...फिर खाना.....फिर आराम.....फिर........