Monday, October 11, 2010

रेडियो धारावाहिक रचना - भाग 2

रचना ' द्वितीय एपिसोड
शादी की उम्र

सूत्रधार 1 - पिछली बार हमने पाया कि रचना के पिता और दादी ने बेहद बुद्धिमत्ता दिखाते हुए रचना की माँ की जिद पूरी नहीं होने दी।
सूत्रधार 2 - हाँ, चूंकि रचना शादी की उम्र के लिहाज से छोटी थी, उसकी शादी करना रचना के साथ अन्याय करना हो
जाता। उसका विवाह बिल्कुल भी न्यायसंगत नहीं होता।
सूत्रधार 1 - ठीक कह रही हो, हमें अपने आस पास ही ऐसे कई किस्से सुनने को मिल जाते हैं कि फलां गाँव में फलां की शादी 14-15 साल में कर दी गई। दो-एक साल में लड़की माँ भी बन गई और जच्चा-बच्चा दोनों की जान को खतरा हो गया।
सूत्रधार 2 - बिल्कुल कम उम्र में बच्ची की शादी करना उसके बचपन के साथ साथ उसकी जिन्दगी को भी नष्ट करना
होता है।
सूत्रधार 1 - और सरकार भी बाल विवाह के खिलाफ है। 18 साल की उम्र से पहले लड़की को विवाह के लिये बाध्य करना दंडनीय अपराध है।
सूत्रधार 2 - बहरहाल हमारी रचना के परिवार ने उस वक्त समझदारी दिखाई और उसे शादी के लिये परिपक्व होने दिया।
(शहनाई की धुन)
सूत्रधार 1 - इस बात को साढ़े तीन साल बीत गये। रचना अब साढ़े 18 की हो गई।
सूत्रधार 2 - और लो सुनो, शहनाई की गूंज। ये शहनाई, बाजे गाजे की आवाज कहाँ से आ रही है?
सूत्रधार 1 - शायद रचना के ही घर से ये आवाजें आ रही हैं
सूत्रधार 2 - हाँ यही लगता है। आओ चल कर देखें।



(शहनाई एवं शोरगुल की आवाजें)
01 - हलवाई को बोला था लड्डू छोटी बूंदी के बनेंगे।
02 - तुमको तो कहा था कि ध्यान रखना।
01 - तो मेरे पास और भी तो काम थे। टेंट वाले के बर्तन कम आये थे उसे गिनती भी तो करना था।
03 - अच्छा ये सब छोड़ो, जितने लड्डू बन चुके ठीक है, बाकी के लिये छोटी बूंदी बनवाओ और बड़ी बूंदी रायते के लिये रखवा लो।
02 - और सुन गौरी के यहाँ साड़ियाँ पीकू-फॉल के लिये गई थीं। दो साड़ियाँ नहीं आई हैं, वो ले आना।
01 - पहले टेंट वाले के बर्तन तो गिनवा लूं।
03 - वो रामू को बोल दे तू पहले.....
दादी - अरे वो रामू कहाँ है। चूलमाटी के लिये सुवासा को तैयार कर लाने भेजा था अभी तक खबर नहीं आई.. और बेटा तू अब आ रहा है...चूलमाटी के लिये देर हो रही है।
पिता - बर्फ का ऑर्डर देने गया था माँ-गर्मी का मौसम है, बाराती ठंडा शर्बत चाहेंगे और सुन माँ वो बाहर आंगनबाड़ी वाली दीदी खड़ी हैं, रवना से मिलना चाहती हैं, उसे ऊपर रचना के कमरे में ले जा।
दादी - वो तू बहू को बोल दे, यहाँ औरतें तैयार बैठी है, चूलमाटी में जाने के लिये...वो मुआ रामू अभी तक नहीं आया, खेलने लग गया होगा....मैं ही जाती हूँ। अरे चाची, तुमने बड़ी देर कर दी।
चाची - मुझे चाची मत कहिये, आप तो बड़ी हैं।
दादी - अरे चाची, तुम तो जगत चाची हो। चलो बाकी लोगों को तैयार करो, जल्दी निकलना है चूलमाटी के लिये। मैं सुवासिनों को देखती हूँ।
चाची - माँ जी वो आंगनबाड़ी वाली आई हैं, रचना से मिलने, उसे मना कर दूँ- बेकार समय खराब करेगी।
पिता - काहे वापस भेजेगी, मिलने आई है तो मिलने दो - रचना को दो-चार अच्छी बातें ही बतायेगी। वैसे भी रचना उसे बहुत मानती है।
चाची - वो क्या बतायेगी। रचना को तो मैं सब समझा दूंगी। मैं चली रचना के पास।
दादी - तुम तो मत ही समझाना चाची - तुम बस बाकी रिश्तेदारों का ख्याल रखो और बेटा वो मंडप लिये डूमर पत्ती लाने कौन गया है?
पिता - तुम तो पहले चूलमाटी में जाओ तुम्हारे वापस आने तक डूमर पत्ती भी आ चुकी होगी। मैं आंगनबाड़ी दीदी को रचना से मिलवा दूँ।
-- -- --

चाची - और रचना बिटिया क्या हाल है। तुम तो बड़ी सुन्दर लग रही हो।
रचना - प्रणाम चाची
चाची - खुश रहो, आबाद रहो, फलो-फूलो, जल्दी से जल्दी, हमें पोते...
रचना - अरे आंगनबाड़ी दीदी आई हैं। आओ दीदी।
दीदी - कैसी हो रचना, कैसा लग रहा है?
रचना - ठीक हूँ दीदी, पर कैसा-कैसा तो लग रहा है।
दीदी - क्यों....क्या कैसा कैसा लग रहा है?
रचना - एक तो घर, दोस्त, गाँव और आंगनबाड़ी सब छूट जायेगा। फिर पता नहीं ससुराल में क्या हो, वहाँ लोग कैसे हों।
दीदी - घर, दोस्त, गाँव तो सभी लड़कियों का शादी के बाद छूटता ही है। पर संबंध थोड़ी न खत्म हो जाते हैं बल्कि प्यार और सम्मान बढ़ जाता है। और फिर जहाँ जाओ वहाँ नया घर-दोस्त, गाँव भी मिलेगा और अच्छी तरह
देखभाल करने वाला पति भी।
रचना - वहाँ पर सबका व्यवहार कैसा होगा, क्या पता।
दीदी - तुम्हें इसकी चिन्ता करने जरूरत नहीं है। तुम पढ़ी लिखी हो, समझदार हो, व्यवहार कुशल हो, तुम खुद सब कुछ संभाल लोगी। ऐसे ही प्रेम-स्नेह से, मधुरता से सब से व्यवहार रखना सब तुम्हें पसंद करेंगे।
चाची - पति तो बेशक तुझे पसंद करेगा और तू भी अपने पति से ही ज्यादा मतलब रखना। बाकी......
01 - (आवाज) चाची जल्दी आओ चूलमाटी में चलना है, सब तैयार हैं।
चाची - तो मैं चलूँ रचना बेटी। बाद में बात करेंगे। पर एक बात हमेशा याद रखना। पति ही सब कुछ है और साल भर के अंदर ही तेरी गोद भर जानी चाहिये, बताए देती हूँ हाँ।
दीदी - उफ् ये चाची भी....
रचना - पर दीदी यहाँ जैसे मुझे कुछ तकलीफ होती थी, तो तुमसे बातें करके बहुत चैन मिलता था।
दीदी - वो भी चिन्ता की बात नहीं, जहाँ तुम ब्याह कर जा रही हो, वहाँ भी आंगनबाड़ी केन्द्र है, वहाँ भी आंगनबाड़ी दीदी है। उससे एक बार मिल लेना, वो भी तुम्हारा ख्याल रखेगी।
रचना - वहाँ भी आंगनबाड़ी केन्द्र है?
दीदी - हाँ भई, बिल्कुल है। तुम्हें पता है बिलासपुर जिले में 1710 आंगनबाड़ी केन्द्र हैं।
रचना - 1710 आंगनबाड़ी केन्द्र!
दीदी - हाँ और सब जगह मेरी तरह आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हैं और तुम जानती हो कि हम रोज शाम को कई घरों का दौरा करते हैं। वहाँ तुम्हारे नये गाँव में भी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता तुम्हारे घर पहुँचेंगी तो तुम्हारी उनसे मुलाकात
हो जायेगी।
रचना - हाँ, लेकिन...
दीदी - अब लेकिन-वेकिन कुछ नहीं। सब ठीक रहेगा। तू बिल्कुल चिंता मत कर - हाँ बस तुम बच्चे के लिये जल्दी मत करना। चाची की बातें इस कान से सुन उस कान से निकाल देना।
रचना - पर दीदी ये तो भगवान के हाथ में है। अपनी मर्जी से थोड़े ही कुछ होता है।
दीदी - सब कुछ अपनी मर्जी पर ही निर्भर करता है। बच्चा न चाहो या दो बच्चों में लंबा अंतराल चाहो तो कई तरीके हैं, जिनसे ये सब हो सकता है।
रचना - ऐसा दीदी!
दीदी - हाँ ये समझ लो कि स्थायी या अस्थायी तरीके होते हैं गर्भ न धारण करने के लिये। स्थायी में एक छोटा सा ऑपरेशन करवा कर गर्भधारण को हमेशा के लिये रोका जा सकता है और ये ऑपरेशन पुरुष और स्त्री दोनों
करवा सकते हैं। पर ये 2 बच्चे हो जाने के बाद ही करवाया जाता है तुम्हारे लिये अस्थायी तरीके ही ठीक रहेंगे।
रचना - ये क्या क्या होते है?
दीदी - जैसे लूप या गर्भ निरोधक गोलियाँ, जिनसे जब तक बच्चा ना चाहो तब तक प्रयोग में लाते हैं और कंडोम जिसे पुरुष द्वारा प्रयोग किया जाता है, जो शुक्राणुओं को गर्भ में प्रवेश ही नहीं करने देता। साथ ही इससे गुप्त
रोग, एड्स आदि से भी बचाव होता है।
रचना - बाबा रे बाबा मुझे तो ये सब पता ही नहीं था।....पर दीदी अगर मेरे वो माने पति ये सब न चाहे तो...
दीदी - तुम समझाना। तुम तो समझदार हो। उन्हें बताना कि स्वस्थ बच्चों के लिये उनमें कुछ अंतराल कितना जरूरी है। ये अंतराल माँ और बच्चा दोनों को स्वस्थ रखता है।
माँ - लो दीदी चाय लो, बहुत देर बातें कर लीं।
दीदी - इतना सारा नाश्ता...ये तो बहुत ज्यादा है..मैं..
माँ - अरे तेरी रचना की शादी है। तू भी खा और इसे भी खिला। लो चाय लो।(आवाजें..)
और रचना को सब समझा दिया ना।
दीदी - हाँ और वैसे ही रचना बहुत समझदार है। लेकिन तुम रचना मेरी बातों को भूलना मत...बच्चे के लिये जल्दबाजी नहीं। और वहाँ की नर्स दीदी हर हफ्ते किसी दिन आती होंगी, उनसे मिल लेना। बाकी वो सब समझा देंगी। एक बात और सफाई का विशेष ध्यान रखना। क्यों बहन रचना के ससुराल में शौचालय तो है ना...
माँ - हाँ है...इसके पिताजी तो उस घर में ही अपनी लड़की नहीं देते जहाँ शौचालय न हो।
दीदी - ये बढ़िया है...तो रचना कोई और परेशानी तो नहीं।
रचना - नहीं दीदी।
माँ - अब मैं तो बेटी ये सब कुछ नहीं समझती, लेकिन तू अपनी दीदी की बातें अच्छे से समझ ले। ये जो भी बतायेंगी तेरे फायदे के लिये ही बतायेंगी।
दीदी - अब मैं चलूँ।
माँ - कहाँ चली अभी मगरोहन, मंडपाच्छादन, दौतेला, हरदियाही, चीकट सब होना है। तुझे इन सबमें शामिल होना है, तू यहीं रुक।
दीदी - अभी बहुत सारे काम हैं। रामजी लाल के यहाँ छोटे वाले लड़के की बहू आई है। थोड़ा उससे मिल लूँ। उसे भी बहुत कुछ समझाना है, पूछना है। बाद में जरूर आऊँगी। एक ना एक कार्यक्रम में रहूँगी।
माँ - ठीक है, अब काम है तो जाओ। लेकिन रचना की बिदाई से पहले आना जरूर।
(शहनाई....., मंत्रोच्चार आदि की आवाजें)
(बाबुल की दुआएँ लेती जा...गाना पार्श्व में)
माँ......रोना
बाबूजी........बेटा.....
-- -- -- --

सास - आ बहू इस कटोरे को पाँव से गिरा दे। (आवाज)
बहुत अच्छा......अब अंदर आ....लो भई लक्ष्मी घर में आ गई। बहू जितने भी रिश्तेदार हैं सबके पैर छू और आशीर्वाद
ले। मैं साथ चलती हूँ, तुझे बताती रहूँगी किस किसके पैर छूने हैं....आ चल....ये ये...तेरी चचेरी सास है...पैर छू और ....ये मेरी ननद और .....ये मेरी छोटी बहन ...ये......
-- -- -- -- --

(चौदहवीं का चाँद हो या आफताब हो गाना पार्श्व में)
(दरवाजा बंद होने की आवाज)
पति - उह...हूँ... रचना ऐ रचना
रचना - जी
पति - तुम...तुम खुश हो शादी से।
रचना - जी
पति - मैं पसंद हूँ तुम्हें।
रचना - जी
पति - तो चलो अपना चाँद सा चेहरा हमें भी दिखा दो।
रचना - जी
पति - अच्छा पहले एक बात बताओ।
रचना - जी
पति - तुम्हें जी जी के अलावा कुछ और भी कहना आता है?
रचना - जी...जी हाँ..मतलब...
पति - (हँसता है) रचना देखो अब हमें जिंदगी भर एक दूसरे का साथ निभाना है। आं...लाओ अपना हाथ दो...हाँ....तो...
मेरा तुमसे वादा है कैसी भी परेशानी हो तुम्हें मैं जीवन में कोई कष्ट नहीं होने दूंगा। आज से मेरे सारे सुख
तुम्हारे और तुम्हारे सारे दुख मेरे।
रचना - ऐ..ऐसा क्यों कहते है....जब आप मेरे साथ हैं तो मुझे काहे का दुख।
पति - बस मुझे यही विश्वास तुमसे चाहिये। देखो रचना, हम बहुत पैसे वाले नहीं हैं, थोड़ी बहुत खेती है और मैं
बिलासपुर जाकर काम करता हूँ। पिताजी का देहांत तब हो गया था जब मैं छोटा था। उसके बाद पढ़ाई के
साथ साथ घर की देखभाल भी करता आया हूँ। लेकिन तुम्हें किसी बात की कोई कमी नहीं होने दूंगा। ये...येकृ
एक अंगूठी तुम्हारे लिये लाया हूँ...पहना दूं।
रचना - जी
पति - अब जरा घूंघट तो हटा दो।
रचना - जी
पति - हर आँख अश्कबार है, हर सांस बेकरार है तेरे बगैर अब जिंदगी, उजड़ी हुई बहार है।
रचना - आप..आप बुरा न मानें तो एक बात कहूँ।
पति - बिल्कुल कहो..मैं काहे बुरा मानूंगा।
रचना - वो...वो...
पति - कहो ना...बेहिचक कहो, आखिर अब हम पति-पत्नी हैं।
रचना - जी ..वो
पति - वैसे तुम लजाती हो तो और सुंदर लगती हो।
रचना - जी
पति - फिर जी..अरे जी जी ही करती रहोगी तो जो कुछ बोलना चाहती हो वो कैसे बोलोगी।
रचना - वो हम...हम लोग अगर बच्चे की जल्दी न करें तो......आप बुरा मान गये।
पति - हा..हा..हा..बुरा! मैं तो बहुत खुश हूँ कि मुझे इतनी समझदार पत्नी मिली है। जानती हो रचना मैं खुद स्वास्थ्य केन्द्र गया था और बर्थ स्पेसिंग याने बच्चों में अंतर आदि के बारे में सारी जानकारी और उसके उपाय सब समझे हैं मैंने। तुम बिल्कुल चिंता मत करो। अभी एक साल तक तो बच्चे के बारे में सोचना भी नहीं है और फिर
बरसात के बाद हमें घूमने चलना है।
रचना - कहाँ-कहाँ जायेंगे।
पति - हरिद्वार।
रचना - हरिद्वार?
पति - हाँ, असल में माँ जाना चाहती है। वहाँ माँ को किसी अच्छी जगह ठहराकर अपन घूमने चले चलेंगे।
रचना - कहाँ?
पति - जहाँ तुम चाहो...और और अब तो घूंघट पूरा हटा दो...उफ्...चौदहवीं का चाँद भी रश्क करता होगा तुम्हारी खूबसूरती से। मचलते हुए दिल की धड़कन ने सुलझे जो काजल से छूटे तो आंचल से उलझे ....(फेड आउट)

8 comments:

  1. CG स्वर - अच्छा नाम हैं, काम भी उम्दा है.

    बधाई और शुभकामना...

    ReplyDelete
  2. बहुत अच्छा.....धन्यवाद|

    ReplyDelete
  3. लेखन के लिये “उम्र कैदी” की ओर से शुभकामनाएँ।

    जीवन तो इंसान ही नहीं, बल्कि सभी जीव जीते हैं, लेकिन इस समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार, मनमानी और भेदभावपूर्ण व्यवस्था के चलते कुछ लोगों के लिये मानव जीवन ही अभिशाप बन जाता है। अपना घर जेल से भी बुरी जगह बन जाता है। जिसके चलते अनेक लोग मजबूर होकर अपराधी भी बन जाते है। मैंने ऐसे लोगों को अपराधी बनते देखा है। मैंने अपराधी नहीं बनने का मार्ग चुना। मेरा निर्णय कितना सही या गलत था, ये तो पाठकों को तय करना है, लेकिन जो कुछ मैं पिछले तीन दशक से आज तक झेलता रहा हूँ, सह रहा हूँ और सहते रहने को विवश हूँ। उसके लिए कौन जिम्मेदार है? यह आप अर्थात समाज को तय करना है!

    मैं यह जरूर जनता हूँ कि जब तक मुझ जैसे परिस्थितियों में फंसे समस्याग्रस्त लोगों को समाज के लोग अपने हाल पर छोडकर आगे बढते जायेंगे, समाज के हालात लगातार बिगडते ही जायेंगे। बल्कि हालात बिगडते जाने का यह भी एक बडा कारण है।

    भगवान ना करे, लेकिन कल को आप या आपका कोई भी इस प्रकार के षडयन्त्र का कभी भी शिकार हो सकता है!

    अत: यदि आपके पास केवल कुछ मिनट का समय हो तो कृपया मुझ "उम्र-कैदी" का निम्न ब्लॉग पढने का कष्ट करें हो सकता है कि आपके अनुभवों/विचारों से मुझे कोई दिशा मिल जाये या मेरा जीवन संघर्ष आपके या अन्य किसी के काम आ जाये! लेकिन मुझे दया या रहम या दिखावटी सहानुभूति की जरूरत नहीं है।

    थोड़े से ज्ञान के आधार पर, यह ब्लॉग मैं खुद लिख रहा हूँ, इसे और अच्छा बनाने के लिए तथा अधिकतम पाठकों तक पहुँचाने के लिए तकनीकी जानकारी प्रदान करने वालों का आभारी रहूँगा।

    http://umraquaidi.blogspot.com/

    उक्त ब्लॉग पर आपकी एक सार्थक व मार्गदर्शक टिप्पणी की उम्मीद के साथ-आपका शुभचिन्तक
    “उम्र कैदी”

    ReplyDelete
  4. ब्लाग जगत की दुनिया में आपका स्वागत है। आप बहुत ही अच्छा लिख रहे है। इसी तरह लिखते रहिए और अपने ब्लॉग को आसमान की उचाईयों तक पहुंचाईये मेरी यही शुभकामनाएं है आपके साथ
    ‘‘ आदत यही बनानी है ज्यादा से ज्यादा(ब्लागों) लोगों तक ट्प्पिणीया अपनी पहुचानी है।’’
    हमारे ब्लॉग पर आपका स्वागत है।

    मालीगांव
    साया
    लक्ष्य

    हमारे नये एगरीकेटर में आप अपने ब्लाग् को नीचे के लिंको द्वारा जोड़ सकते है।
    अपने ब्लाग् पर लोगों लगाये यहां से
    अपने ब्लाग् को जोड़े यहां से

    कृपया अपने ब्लॉग पर से वर्ड वैरिफ़िकेशन हटा देवे इससे टिप्पणी करने में दिक्कत और परेशानी होती है।

    ReplyDelete
  5. ब्लॉग जगत में आपका स्वागत है।
    आशा है कि आप अपने सार्थक लेखन के माध्यम से ब्लॉग जगत को समृद्ध करेंगी।

    ReplyDelete
  6. संज्ञा जी-ब्लॉग जगत में आपका स्वागत है।
    आपके ब्लॉग की चर्चा आगामी 14/10/10 की ब्लॉग वार्ता पर है।

    ReplyDelete
  7. हिंदी ब्लाग लेखन के लिए स्वागत और बधाई
    कृपया अन्य ब्लॉगों को भी पढें और अपने बहुमूल्य विचार व्यक्त करने का कष्ट करें

    ReplyDelete
  8. अच्छी पोस्ट ,विजय दशमी की शुभकामनाएं । पढ़िए "खबरों की दुनियाँ"

    ReplyDelete